विवाह हो तो ऐसा जिसमे कोई विलेन नहीं
- by Admin (News)
- Apr 04, 2021
बिहार के भागलपुर जिले में एक ऐसी घटना आँखों के सामने से गुजर गया जो बीते होली उत्सव में चार चाँद जड़ गया | दो युवा जोड़ी पूर्व परिचित चेहरे पर गुलाल लगाते लगाते प्रेमिका की मांग में सिन्दूर सजा दिया , प्रेमिका की मित्र मंडली व परिवार इस हकीकत फिल्म को देखकर आचम्भित रह गए | मांग में भरा सिंदूर देख कर दोनों परिवार व समाज वाले विचलित नहीं हुए और उन्हें जीवन में कभी न भुलने वाली सजा दे डाली , उन्हें दूसरे हीं दिन सभी के सामने सात फेरे लेकर सात वचनों में कैद कर विवाह बंधन में बांध दिया |
गावं के हीं शिव मंदिर में दोनों का विवाह संपन हुआ और गावं के लोगों ने इस शादी में अपनी सहमति जताते हुए आशीर्वाद के बोल उनपर लुटाते चले गयें दूसरी तरफ समधी बने दोनों के पिता आपस में गले मिले और बुजुर्गों ने नव दम्पति को दीर्घायु व सुखी जीवन का आशीर्वाद दिया |
अब आते है विस्तार से :- करीब एक साल से कहलगावं प्रखंड के वंशिपुर गावं के निवासी राहुल और ज्योति एक दूसरे से बेइंतहा प्यार करने लगे थे मगर हर बच्चे अपने घर , समाज वाले का दिल नहीं तोड़ते और न घर से भागते है | हालाकि उनके प्यार की भनक सभी को लग चुकी थी | राहुल व ज्योति ने काफी चालाकी से काम लिया और होली के पावन पर्व व उत्सव पर ज्योति राहुल के घर अपनी मित्र मण्डली के साथ गई और उनके परिवार के सामने राहुल को गुलाल लगाना शुरू किया , राहुल भी पीछे कहाँ रहने वाला था गुलाल लगाते लगाते अपनी प्रेमिका की मांग सिंदूर से सजा दिया और ! यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि यह दोनों की पूर्व सोंची समझी स्क्रिप्ट थी |
लेकिन ! यह दृश्य देखकर परिवार वाले जरा भी विचलित नहीं हुए और बुद्धिमानी से काम ली क्योंकि बच्चे उनके भविष्य थे | गावं के लोग एकत्र हुए , पंचायती बिठाई गई और दोनों के विवाह सहमति पर मोहर लगा दिया गया | ज्योति बी०ए० की छात्रा है और राहुल इंटर का | राहुल अपने पिता चंद्रकेतु मंडल एवं माता स्वर्गीय पुष्पा देवी के इकलौते बेटे हैं , राहुल की चार बहने भी है | पिता बाल विकास परियोजना से सेवानिवृत है वहीं माँ आंगनवाड़ी में सेविका थी | ज्योति भी माँ बाप की इकलौती सुपुत्री है - माँ पिंकी देवी व पिता पंचानंद मंडल |
यह दोनों परिवार व गावं वाले ने यह साबित कर दिया कि दिल उनके पास भी है और दिमाग भी |वे बच्चों के प्यार व जज्बात से न खेलते हुए इस प्रेम को सात वचनों व सात फेरों का एक खुबसूरत रूप देकर बच्चों को कभी न भुलने वाला , एक दूसरे के साथ जीने का मोहर लगाते हुए उपहार दे डाला | यह अलग बात है की दोनों स्वजातीय थे लेकिन ! इस होली में खुशियों से सज गई इनकी जोड़ी इन्द्रधनुषी बनकर | अब ! हर होली में इनके प्यार की रंगोली को लोग याद रखेंगे |
इस तरह के प्रेम विवाह को हम एक नया नाम दे सकते है , विवाह हो तो ऐसा ! जिसमे कोई विलेन नहीं | .....( न्यूज़ :- भव्याश्री डेस्क )

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