अफगानिस्तान में उजड़ते मंजर के बीच एक लहराता पेड़ पंजशिर में , काबुल एयरपोर्ट पर राहत देता USA का कब्ज़ा | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Aug 22, 2021
अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्ज़ा हुए सप्ताह गुजर गए | विभिन्न - विभिन्न देशों में लोग पहुंचाए जा रहे है | दुनियां भर की देश अफगानियों को गले लगा रही है | काबुल एयरपोर्ट पर नजारा बहुत हीं भयावह है , फायरिंग की आवाज से बच्चे डरे व सहमे हुए है | परन्तु जैसे हीं दूसरे देश से आये सुरक्षाकर्मियों को बच्चे देखते है , तो उनसे लिपटकर रो पड़ते है , जैसे कि वे हीं उनके सगे हो | सच भी है - जो दुःख में काम आ जाये वहीं सच्चा दोस्त होता है |
अमेरिका सहित कई देश के सैनिक आज काबुल एयरपोर्ट पर तैनात है और सैनिक एयरपोर्ट से लोगों को निकाल रहे है | काबुल एयरपोर्ट पर भावुक कर देने वाली परिस्थिति उत्पन्न है , वहां के लोग दहशत से बेचैन है | बस इस बात की सोंच है कि - कोई अपना मिले , कोई सहारा मिले ताकि अफगानिस्तान से दूर कहीं राहत की साँस ली जाए |
दुनियांभर के देश अफगानी का तहे दिल से स्वागत कर रहे हैं व आमंत्रण दिया | सुरक्षाकर्मी , बच्चों को बहुत राहत दे रहे हैं , जर्मनी से बहुत सारे खिलौने बच्चों के लिए लाये गए हैं | वहीं इनलोगों ने बच्चों को हंसाने , खेलाने व खान-पान का भी पूरा ख्याल रखा है | इन बच्चों ने अभी से हीं सुरक्षाकर्मियों और तालिबानों को पहचानना आरम्भ कर दिया है | इन्हें अपने व पराये का अनुमान होता जा रहा है |
दुनियां भर की ताकत आज एकजुट होकर तालिबानों को नतमस्तक कर देने पर मजबूर कर देगी | शनिवार को भारतीय वायुसेना विमान द्वारा 168 लोगों को भारत लाया गया | इस विमान में 107 भारतीय नागरिक है वहीं अतिरिक्त लोग अफगानी सिख और अफगानी हिन्दू है |
इसके साथ अफगानी सांसद नरेन्द्र सिंह खालसा की बात करे तो , वो जैसे हीं भारत एयरपोर्ट पर उतरे की मीडियाकर्मी के पूछे गए सवाल पर रो पड़े और कहा कि - 20 वर्षों में जो बनाया था , वह सब ख़त्म हो गया | अपने वतन की दुर्दशा देखकर नरेन्द्र सिंह खालसा की आँखे भर आई और रुंधी हुई गले से आवाज निकल रही थी | उनकी आँखें रो - रोकर लाल हो चुकी थी और आंसू निकलना बंद नहीं हो रहा था | अपनी मुल्क की यादें उन्हें तड़पा रही है |
इसी विमान पर आई एक महिला ने बताया कि - वहां के हालात बिगड़ते हीं जा रहे हैं , इसलिए मै अपनी बेटी और दो पोतों के साथ बाहर आई हूँ | तालिबान ने हमारे घर को जला दिया | भारत के भाई - बहन हमें बचाने के लिए आगे आये हैं , हम उन्हें और भारत का शुक्रिया करते है |
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ गनी अभी दुबई में है | वहीं अफगानिस्तान में तालिबान का कब्ज़ा होते हीं अमेरिका ने फंड को लॉक कर दिया , जिससे तालिबान के बीच छटपटाहट जारी है | तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्ज़ा तो जमा लिया , परन्तु उसे दुनियां भर से मुहैया होने वाली संशाधनों पर रोक लगा दी गई है |
अफगानिस्तान में आकर्षित करने वाली वो जमीन है , जिसकी मिट्टी को धन का खजाना कहा जा सकता है | जैसे लोहा , कॉपर , कोबाल्ट , लिथिमिया , सोना के साथ दुर्लभ खनिज के बड़े भण्डार भी मौजूद है | परन्तु इसका खरीदार कौन होगा ? इन पाए जाने वाले सामान से बड़े पैमाने पर - इलेक्ट्रिक कार , टीवी , कंप्यूटर , मोबाइल फोन , बैट्री , लेजर बनाने में किया जाता है | खासकर चाइना इसका खरीदार है | चाइना ने अगर हाथ मिला लिया तो संभव है , परन्तु हाथ मिलाने से पहले चाइना भी कई बार सोंचेगा !
अफगानिस्तान का नजारा यह है कि - सप्ताह गुजरने के बाद अब वहां तालिबानों के खाने - पीने का पर्याप्त व्यवस्था नहीं | डीजल - पेट्रोल जैसे सुविधा भी नहीं , जिससे वह अपने वाहन को चला सके | इनका गुस्सा आम नागरिकों पर उतर रहा है | इनके द्वारा घर में लूटपाट करने का काम भी जारी है | कितने घरों को अब तक ये जला चूका है , महिलाओं पर खाना बनाने की हुकूमत जमा रहा है | वहीं शारीरिक शोषण में भी कमी नहीं है | अच्छे खाने नहीं बनने पर , उन्हें आग के हवाले करने से भी वह बाज नहीं आ रहे है |
बंद हुए दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारी को बिना वेतन हीं काम करने पर मजबूर कर रहे हैं , गर ये इंकार कर दे , तो अंजाम समझा जा सकता है | राज्य व शहर के विभिन्न घरों से करोड़ों रुपये , जेवरात व सम्पतियों को लूट लेने की खबर है | गाड़ी तक नहीं छोड़ रहे , उसे भी उठा ले जा रहे है | तालिबानी योजनाबद्ध तरीके से कई जगहों पर फिरौती न मिलने पर सैकड़ों लोगों को अपरहण कर , हत्या करने से भी बाज नहीं आया , जिसकी सूचना दिल दहला देने वाली है |
कहीं बच्चे माँ से बिछड़ रहे है , तो कहीं पत्नी से पति , तो कहीं बहन से भाई , तो कहीं पिता से पुत्री | इधर - उधर भटकते हुए कई लोग तो सपरिवार एक विमान से दूसरे देश भी नहीं जा पा रहे हैं , कोई पहले पहुंचता है तो कोई बाद | बड़ी मुश्किल है परिस्थिति को संभालना ! मगर वहां हर देश से आये सुरक्षाकर्मी पूरी निगरानी और लोगों को सुरक्षा मुहैया करा रही है | बावजूद वहां से हर दिन तड़पती हुई आवाज निकलकर सामने आ रही है , जो बेहद डरावना है |
महिलाओं पर घरेलु काम का दबाव और इनके साथ शारीरिक शोषण , रोंगटे खड़े करने पर मजबूर कर रही है | हालात बेचैन , बेहाल कर देने वाला है | शुक्र है कि अफगानिस्तान के काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अभी USA आर्मी का कब्ज़ा है , जिससे वे तमाम देश के उड़ान को विभिन्न - विभिन्न जगह नागरिकों को ले जाने में मदद कर रहे हैं | साथ हीं नाउम्मीदी के बीच उम्मीद का चिराग भी वहां जलता हुआ नजर आ रहा है |
पंजशिर एक ऐसा राज्य है , जहाँ तालिबानियों की पहुँच नहीं थी | परन्तु पंजशिर घाटी में भी लड़ाके पहुँच चुके है | साथ हीं चेतावनी भरा सन्देश भी छोड़ा है - अगर सरल तरीके से अहमद मशूद की सेनायें सरेंडर नहीं करेगी , तो हम हमला बोलेंगे | अहमद मशूद अहमद शाह मशूद के बेटे है , जिसे अफगानिस्तान का केयर टेकर राष्ट्रपति घोषित किया जा रहा है | अभी अमरुल्लाह साहेल तालिबान को कड़ी टक्कर दे रहे हैं | अभी पंजशिर में नया नेतृत्व बन रहा है , जिन्होंने तालिबान की सत्ता को मानने से इंकार कर दिया |
अहमद शाह मशूद भी तालिबानियों से हमेशा लड़ते हीं रहे हैं | इन्होने तो सोवियत संघ को भी अफगानिस्तान से बाहर निकालने में कसर नहीं छोड़ी थी | भले हीं 2001 में तालिबान और अलकायदा के लड़ाकू ने अहमद शाह मशूद की हत्या कर दी | मगर उनके बेटे अहमद मशूद के लहू में अभी भी वहीं गर्माहट है कि - वे सर कटा सकते है मगर सर झुकाना कबुल नहीं करेंगे |
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने बिना किसी लड़ाई के आत्मसमर्पण कर दिया | इसके पीछे उनका क्या उद्देश्य था ? यह आगे आने वाला समय हीं बताएगा | फिलहाल अफगानिस्तान के नागरिकों को हफ्तेभर में अमेरिका ने 17 हजार लोगों को राहत दिया है | वहीं जर्मनी , इटली , फ्रांस , भारत आदि देश वहां के तड़पते हुए लोगों को राहत देने में अग्रिणी रही है | अभी भी करीबन 10 हजार से ज्यादा लोग एयरपोर्ट पर अपनी सुरक्षा की बाट जोह रहे हैं |आर्मी सेना व सुरक्षाकर्मी उनके खाने - पीने का भी इंतजाम कर रही है |
आसमान में भले हीं काले बादल छा गए हो , जिससे सूर्य की गति थोड़ी मद्धिम जरुर पड़ गई | परन्तु आने वाले कल में यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि - दुनियांभर के देश की ताकत के एकजुटता से , वहां फिर से सूर्य की वहीं किरण रौशनी देगा , जिस रौशनी को तालिबान कम नहीं कर सकता |
चलते - चलते बता दें कि - इस बीच UAS एयरफोर्स ने जर्मनी में अमेरिका के रामस्टीन एयर बेस पर एक इमरजेंसी लैंडिंग करवाई , जहाँ की धरती पर अफगानिस्तान की एक महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया | इन सभी को अफगानिस्तान से अमेरिका लाया जा रहा था कि एयर दबाव के कारण अचानक महिला को दर्द उठने लगा और अमेरिकी एयरक्राफ्ट C17 ग्लोब मास्टर में बच्चे को जन्म दिया |
अमेरिका एयरफोर्स ने सोशल मीडिया पर यह बताया है कि - महिला व बच्चा दोनों हीं स्वस्थ है और पास के हीं अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया है | ...... ( न्यूज़ :- भव्याश्री डेस्क )
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