76 साल बाद सर्वोच्च न्यायालय परिसर में डॉ० बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने किया | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Nov 27, 2023
26 नवम्बर संविधान दिवस के अवसर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने "न्यायालय परिसर" में भारतीय संविधान निर्माता डॉ० बाबासाहब भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा का अनावरण किया | इस समारोह में अदालत ने विभिन्न क्षेत्रो से सम्मानित हस्तियों को आमंत्रित किया जिसकी मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू थी | यह एक ऐतिहासिक दिन है |
संविधान जो हमें आजादी व समानता के साथ जीने का अधिकार देता है , नागरिकों में सम्मान की भावना को एकता में पिरोते हुए सदैव आगे बढ़ाता है | आज का दिन भारत के नागरिकों के लिए ख़ास और एतिहासिक दिन है |
इस प्रतिमा को नरेश कुमावत ने बनाया है जिसकी उंचाई 7 फीट है | इस प्रतिमा में डॉ० अंबेडकर वकील की पोशाक पहने , एक हाथ में संविधान की प्रति लिए 3 फूट ऊँचे आधार पर खड़े दिखाई पड़ रहे हैं | यह प्रतिमा देश को मजबूत करता है और संविधान पढ़ने की प्रेरणा देती हुई नतमस्तक होने का ज्ञान देता है | संविधान को पढ़ना / जानना / समझना , इंसान को इंसान बनाये रखने हेतु ज्ञान का वह भण्डार है जहाँ हर आदमी को रौशनी मिलता है |
आज से पहले ऐसा नहीं था - भारत में या अन्य जगहों पर जहाँ भी इनकी प्रतिमा देखी गई है या जिन्होंने इसे बनाया तो प्रतिमा हाथ उठाये आगे की तरफ बढ़ने की प्रेरणा देते हुए दिखाई पड़ता है मगर इस प्रतिमा में बहुत हीं अलग और ख़ास है |
आजादी के 76 साल के बाद सुप्रीमकोर्ट ने इतिहास रचा जिसका अनावरण राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने किया |
26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा ने भारत के संविधान को लागू करने के लिए तैयार किया | इसका अंतिम पाठ 25 नवम्बर को पूरा हो गया तब उन्होंने देश के भविष्य के विषय में एक महत्वपूर्ण सन्देश दिया था - 26 जनवरी 1950 को हम विरोधाभासभरी जीवन में प्रवेश करने जा रहे हैं | राजनितिक जीवन में तो हमारे पास समानता होगी परन्तु सामाजिक व आर्थिक जीवन में असामनता होगी | 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और देश को स्वतंत्र होकर आगे बढ़ने की गति मिली |
इस संविधान के जरिये छुआछूत ख़त्म कर वंचितों के लिए एक सकारात्मक सोंच है | संविधान जो सबको सामान अधिकार से जोड़े रखता है | भारत एक है इसलिए भारत में जन्म लेनेवाले के लिए अधिकार भी एक हीं होने चाहिए | लोगो के हीत की रक्षा करनेवाला यह संविधान , जाति - धर्म , अमीरी - गरीबी , शिक्षित - अशिक्षित सभी के लिए सामान अधिकार देनेवाला एक सुमार्ग है | यह ढाल है और ऐसा तलवार जिसके बल पर लड़कर हमें हमारा न्याय दिलाता है साथ हीं हमें हमारी जिम्मेदारियों को भी याद दिलाता है |
26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा ने औपचारिक रूप से संविधान को अपनाया था इसलिए इस तारीख को याद रखने के लिए संविधान दिवस मनाया जाता है | यह दिवस वश्व में एक अलग हीं रौशनी देता है क्यूंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है | ......... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )
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