सूरत के हिम्मत नगर सोसाईटी के भक्तो द्वारा हनुमान जयंती महोत्सव का आयोजन धूमधाम से मनाया गया | महिला मंडल का सहयोग भक्तिमय भाव से भरा रहा |
- by Admin (News)
- Apr 13, 2025
दुनियाभर में चैत्र माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि 12 अप्रैल को श्री राम के परमभक्त संकटमोचन हनुमान की जयंती काफी उत्सुकता पूर्वक धूमधाम से मनाई गई | यह अवसर बजरंगबली की स्तुति का विशेष दिन माना गया है जहाँ मुरादें पूरी होती है | 12 अप्रैल से 15 अप्रैल तक जगह जगह कीर्तन व रामयण पाठ की तैयारी जोरो पर है | श्री हनुमान भगवान शिव के रौद्र रूप है , यह अवतार रावण की मनोकामना व प्रसन्नता से जुड़ा है साथ हीं श्री नारायण के सामिप्य व उनकी मदद का एक कारण बना जिसका असर कलयुग के अंत तक जीवित रहेगा |
यह अवतार सूर्योदय काल के समय हुआ इसलिए इस रूप की पूजा मनुष्य के जीवन में रौशनी भरने का काम करता है | इस अवसर पर आज के दिन लोग प्रातःकाल से हीं अध्यात्मिक विचार की भावना से प्रवचनों का आयोजन कर वातावरण को शुद्ध व निर्मल बनाने के प्रति अपना उत्साह / उदारता / प्रेम व एकता के साथ ह्रदय की पवित्रता व भावना को इस अवतार पर समर्पित कर भक्त और भगवान के मिलन का सुखद अनुभव कर अपनी तृप्ति को एक माला में पिरोकर स्वयं को उनके चरणों में समर्पित करते हैं जिससे हनुमान अपने व रामभक्त पर विशेष कृपा कर उनकी ईच्छा पूर्ण कर आशीर्वाद देते हैं | कहीं रामायण पाठ तो कहीं सुन्दरकांड मन को पवित्रता की डोर में बांधे रखकर शुद्धता को जागृत किया |
मारुति यज्ञ के दौर में सुगन्धित पल / आलम के बीच कीर्तन की जयकारा से गूंजता रहा वातावरण | नारे कई थे वहीं सबकी जुबां पर श्री हनुमान का नाम माँ सरस्वती को पुलकित करता रहा और विचारभाव निर्मल बनते रहे | ऐसे जगह में इनकी मौजूदगी का अनुभव साक्षात् किया जा सकता है |
आँखों देखा हाल में - आज के दिन सूरत के हिम्मत नगर सोसाईटी में भक्त व मंदिर के कार्यकर्ताओं के बीच भी यहीं आलम रहा | सैकड़ो की संख्या में भीड़ उमड़कर जयकारे लगाए जहाँ एक तरफ मंदिर प्रांगण में कीर्तन की धूम मची थी तो वहीं सड़क के बीचोबीच आम जनता की दृष्टि दीदार हेतु LED पर यह लुभावना चुम्बकीय दृश्य लोगो को मोहित कर बांधे रखा |
ब्रह्म मुहूर्त से हीं यह पहल और भजन का आलम ह्रदय को पवित्रता से मालामाल करता रहा | संध्या के समय से हीं प्रसाद वितरण व भोजन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा | सैकड़ो की संख्या में भक्त के भीड़ को एक लाइन के क्रम में देखना आँखों को ओझल कर गया | समझा जा सकता है लोगो को प्रसाद और भोजन करने की इस परम्परा की होर को जिसे सम्मान पूर्वक जीवित रखते हुए कार्यकर्तागण प्रफुल्लित नहीं समाये |
भूखे को भोजन खिलाना आत्मा की तृप्ति का परिचायक है और आत्मा में हीं परमात्मा का निवास स्थान होता है | ऐसे कार्य करनेवाले भक्तो पर श्री हनुमान की विशेष कृपा रहती है और उनकी मौजूदगी उन्हें हर घड़ी संकट से बचाती है |
कार्यकर्ताओं से जब मेरा मिलना हुआ तो इनके चेहरे पर अद्दभुत मुस्कराहट और शांति देखने को मिली | लगा जैसे ये सभी दुनिया में ईश्वर भक्ति और सेवा आराधना के लिए हीं समर्पित हुए हैं | ऐसा इसलिए कि इनके रोम रोम में बसे हैं श्रीराम | भक्त और भगवान के मिलाप की मौजूदगी में यहाँ के वातावरण की चमक हीरे से कहीं ज्यादा निखरा निखरा रहा | इनके चहरे का आकर्षण देखकर दिल दुआओं का समर्पण स्वयं को आनंद से भरता गया |
इस मंदिर की रूप रेखा की चर्चा हम आगे करेंगे | कार्यकर्तागण की सोंच पटल पर कैसे और कबतक उतरेगी इसे अंकित करेंगे मगर यह तय है कि अगले वर्ष की तैयारी और भी जोरो पर तैरेगी वहीं नजारा कई गुना बेहतर होगा | वैसे भी मंदिर निर्माण के बाद से हीं कार्यकर्तागण इस मंदिर की रौनक को सदैव बढ़ाने का काम किया है जिससे यहाँ का वातावरण सुगन्धित होकर एकता में पिरोते हुए सनातन धर्म के अध्यात्मिक ग्रंथो की यादें व अच्छे बुरे कर्मो के भोग से रूबरू कराने का धर्म कार्य कर लोगो को सुमार्ग दिखाते रहे , यहीं तो गीता का उपदेश है |
सैकड़ो लोगो को प्रसाद और भोजन करानेवाले हिम्मत नगर सोसाईटी के भक्त कार्यकर्तागण , मारुति धुन मंडल व महिला मंडल व सत्संग आदि ब्रह्ममुहूर्त से देर रात तक चलनेवाला यह भक्तिमय आयोजन सुमंग की तरह गुलाब की कोमलता व सुगन्धित शबनम की बुँदे छिड़कती रही | लोग झूमते रहें , गुनगुनाते रहें मस्ती भरा यह आलम मारुति दर्शन व आशीर्वाद के लिए समर्पित था | दर्शन देखते हुए यह कहना शायद अतिश्योक्ति नहीं होगा कि यहाँ मेरा ह्रदय मन शिवालय बना |
बहुत जल्द हम नाशिक की धरती पर होंगे और आपको अंजनेरी पर्वत पर लिए चलेंगे जहाँ श्री हनुमान की जन्म स्थली है | बाल्यकाल में इसी स्थान से सूर्य को पकड़ने के लिए श्री हनुमान ने छलांग लगाईं थी |
