ईरान के राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी की हेलिकॉप्टर क्रैश में मौत , इसमे विदेशमंत्री सहित 9 व्यक्ति हादसे का शिकार हुए | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- May 21, 2024
ईरान के राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी की हेलिकॉप्टर क्रैश में मौत , वो 65 वर्ष के थे | हेलिकॉप्टर रविवार को क्रैश हुआ था , काफी घंटा तक घना कोहरा और बारिश की वजह से राष्ट्रपति और हेलिकॉप्टर का पता ही नहीं चला | मौत की पुष्टि सोमवार को मलबा निकलने के बाद हुई जिसके बाद पुरे देश में हलचल मच गया |
हेलिकॉप्टर में इनके साथ ईरान के विदेशमंत्री सहित 9 लोग सवार थे जिसमे सभी की मौत हुई | ईरान की कैबिनेट ने अपने आधिकारिक ब्यान में राष्ट्रपति की मौत पर अपनी संवेदना जताते हुए कहा कि - ईरान की शासन व्यवस्था पूर्व की तरह चलती रहेगी |
जानकारी के आधार पर राष्ट्रपति रईसी अजरबैजान में कीज कलासी और खोदाफरिम बाँध का उद्घाटन करने गए थे | जहाँ हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ , वह इलाका तबरेज शहर से 50 किलोमीटर दूर वर्जेकान के पास है |
रईसी की मौत संदेह के घेरे में भी घिरी | हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ या फिर किसी साजिश का नतीजा तो नहीं ! अभी कुछ कहा नहीं जा सकता क्यूंकि रविवार को वहां का मौसम बहुत खराब था परन्तु राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर के साथ 2 अन्य हेलिकॉप्टर भी एक साथ हीं उड़ान भर रहा था जिसमे मंत्रीगण और अधिकारी मौजूद थे , वे सभी सुरक्षित पहुँच गए | तो सवाल उठ गया कि आखिरकार राष्ट्रपति का हीं हेलिकॉप्टर क्यूँ क्रैश हुआ ?
रईसी , बेल 212 हेलिकॉप्टर पर सवार थे , ये मोडल अमेरिका में बना था | अब सत्ता उपराष्ट्रपति मुहम्मद मुखबर संभालेंगे | 50 दिनों के अन्दर फिर से चुनाव कराया जाना है |
रईसी अब इस दुनियां में नहीं , मृत्यु के बाद सिर्फ इंसान की छवि हीं ज़िंदा रहती है | उन्होंने किसके लिए और कितना अच्छा कार्य किया और किसके लिए ........... ! अब यहीं एक इतिहास है |
इनका जन्म 1960 में उत्तर पूर्वी ईरान के शहर मशहद में हुआ था जहाँ शिया मुसलमानों की सबसे पवित्र मस्जिद भी है | इनके पिता एक मौलबी थे | रईसी जब 5 वर्ष के थे तभी इनके पिता की मृत्यु हो गई थी |
जून 2021 में उदारवादी हसन रूहानी की जगह इस्लामिक रिपब्लिक ईरान के राष्ट्रपति चुने गए थे , ये धार्मिक स्कॉलर और जज भी रहे | राष्ट्रपति पद से पूर्व उन्होंने कई पद संभाले |
यहाँ सत्ता की शक्तियां - मौलिबियों , राजनेताओं और सेना में विभाजित है | यहाँ किसी मामले में अंतिम निर्णय राष्ट्रपति का नहीं होता बल्कि सुप्रीम लीडर का होता है | अन्य देशो से इस देश का सरकारी कार्य और तरीका अलग है | यहाँ किसी मामले में सुप्रीम लीडर का निर्णय हीं अंतिम होता है , अभी इस पद पर अयातुल्लाह खामनेई बने हुए हैं जिनकी उम्र 85 वर्ष है | अगले कुछ साल में वे इस पद से रिक्त हो जायेंगे | ईरान को इस पद के लिए उपयुक्त उत्तराधिकारी हेतु चुनाव से गुजरना होगा | ऐसा माना जा रहा था कि रईसी सुप्रीम लीडर खामनेई के बहुत करीबी व खास व्यक्ति थे , ऐसे में संभावना था कि खेमनेई के बाद इस पद को इब्राहीम रईसी हीं संभालेंगे परन्तु उनके निधन के बाद अब राष्ट्रपति के पद के लिए नए सख्स का चुनाव मतदान द्वारा किया जायेगा |
वैसे माना जा रहा है कि ईरान की आर्थिक हालत भी ठीक नहीं है | सऊदी अरब सहित मध्यपूर्व के कई देशो के साथ सम्बन्ध भी तनावपूर्ण चल रहे हैं बावजूद कई देश की संवेदना इनके साथ है | अब सवाल ये है - इनके साथ आनेवाले समय में कितने देशो का हाथ साथ होगा , ये तो आनेवाला वक्त हीं बताएगा | फ़िलहाल इस दुखद घड़ी में सभी उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए दुःख प्रगट कर रहे हैं | .......... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )
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