चाइनीज मांझा से कटा उज्जैन की 20 वर्षीय नेहा अंजना का गला , तड़पती हुई दुनिया को कहा अलविदा | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Jan 15, 2022
मध्यप्रदेश के उज्जैन में एक दुखद घटना घटी , जहाँ एक छात्रा का गला मांझा से कट गया और उसकी मृत्यु हो गई |
14 / 15 जनवरी मक्रसक्रांति उत्सव जहाँ लोग विशेष व्यंजन का मजा चखते / चखाते है | वहीं साथ हीं रंग - बिरंगे पतंगे उड़ाने का काम कर एक - दूसरे के पतंगों को काटकर मजे लेते है और बोल पड़ते है - वाह ! क्या काटा |
कटी हुई पतंगों को भी लूटने वाले की कमी नहीं | पतंग की गति जैसे - जैसे आसमान से धरती की ओर सड़कती है , लोग पतंगों पर अपनी नजरें टिकाये सड़को पर बेझिझक दौड़ पड़ते है पतंगों को लूटने के लिए | पतंग पाकर ऐसे झूम उठते है , जैसे मानो उसने जिंदगी की बाजी मार ली हो | मगर यह ख़ुशी खतरे की घंटी भी है | इस ख़ुशी का लोग वर्षो इन्तजार करते है |
त्योहार तो उत्साह , उमंग मनाने के लिए बनाये गए है , मगर इंसानी फिदरत ने इसे जानलेवा बना दिया है | दीपावली में पटाखा तो होली में रंग , ठीक वैसे हीं 14 जनवरी को पतंगों में लगाए जाने वाले धारदार डोर |
महितपुर ब्लॉक के नारायणा गाँव की रहने वाली नेहा अंजना अपने मामा के घर उज्जैन पढ़ाई करने आयी थी और अपनी ममेरी बहन के साथ स्कूटर से इंद्रा नगर से फ्रीगंज के लिए निकली थी | जीरो पॉइंट ब्रीज पर उसकी गर्दन में चाइनीज मांझा उलझ गया और उसका गला मौके पर हीं कटता चला गया | वह सड़को पर तड़पती रही , जहाँ घटना स्थल पर उसकी मृत्यु हो गई |
नेहा की ममेरी बहन जो उसके साथ थी , ने सुनाया आँखों देखा हाल - जिसे सुनकर दिल दहल सा गया और रौंगटे खड़े हो गए | हादसे के बाद नेहा काफी देर तक तड़पती रही | गाड़ी से घटना स्थल खून से लहूलुहान हो गया , लेकिन वहां से गुजरने वाले लोग तमाशबीन बने रहे , किसी ने मदद के लिए कदम नहीं बढ़ाया | अगर लोगो में इंसानियत जीवित होता तो नेहा अभी जीवित होती |
मगर वहीं एक इंसान जिनका नाम रविन्द्र सिंह सेंगर है और पेशे से अधिवक्ता , बच्ची के मदद के लिए आगे बढ़े | उन्होंने उसे अपनी कार में बिठाया और पाटीदार हॉस्पिटल ले गए , लेकिन अफ़सोस नेहा की मौत बीच रास्ते में हीं हो चुकी थी |
माधव नगर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है | TI मनीष लोढ़ा इस मामले की जाँच में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और और कसूरवार को सजा मिलेगी , ऐसा आश्वासन मिला |
अब हम आपको चाइनीज मांझे से दीदार करा दे - तो आप इसे प्लास्टिक का मांझा भी बोल सकते है | यह धागा नायलोन और मैटेलिक पाउडर को मिलाकर बनाया जाता है |मांझा में - शीशा , बज्रम , मैदा , गोंद , एल्युमिनियम ऑक्साइड और जिरकोनिया ऑक्साइड शामिल है |
यह धागा स्टेचेबल होता है | इस धागा को जितना अपनी तरफ खिचेंगे यह डोर आसमान के तरफ उतना हीं बढ़ता चला जाएगा | इसकी धार ब्लेड की तरह धारदार बनाई जाती है , गर कहीं लग जाए तो इंसान जख्मी हुए बिना नहीं रह सकता |
वैसे भी चाइना का हर वस्तु देखने में जितना खुबसूरत और लुभावना लगता है , उससे कहीं ज्यादा जिंदगी में खतरा को आमंत्रित करता है | चाइना का सामान खरीदना "आ बैल मुझे मार" जैसा है | मगर यह तो इंसान को सोंचना है कि - पतंग उत्साह के लिए उड़ाया जाए या फिर किसी की जिंदगी ...... !
सरकार ने इस मांझे पर 2017 से प्रतिबन्ध लगा रखा है , जिसमे 5 साल का जेल या 1 लाख रुपये की जुर्माना का प्रावधान भी है |
इंसान तो इंसान पक्षियों के लिए भी यह धागा जानलेवा है | आसमान में पतंगों का उड़ाना और पक्षियों का उड़ना , जिसमे इंसान बेजुबानो की जिंदगी की डोर चाइनीज मांझा से काट रहे है और उन्हें जरा भी दर्द नहीं है |
यह घटना पहली नहीं और न आखिरी है , जिसमे नेहा की जान गई | नेहा की उम्र मात्र 20 वर्ष थी , वह दुनियां को पूर्ण रूपेण देखने / समझने और कुछ देने से पहले चली गई , जिसकी पूर्ति संभव नही | घटना जिस वक्त घटती है - समाचार बनकर वायरल होता है और फिर धुंधला पड़ जाता है | हर साल इस जानलेवा मांझे की बिक्री जोड़ो पर होती है |
इससे पूर्व भी मंगोलपुरी फ्लाई ओवर पर सौरव दहिया की दर्दनाक मौत हो गई थी , जिसमे 304A के तहत मामला दर्ज किया गया था , परन्तु पतंग उड़ाने वाले का कोई सुराग नहीं मिला | पब्लिक चाहती है कि इस मांजे पर बैन लगे | पतंग उड़ाना हो तो सिर्फ सूती धागा से उड़ाई जाए |
यह कहना शायद अतिश्योक्ति न होगा कि - मांझे से अगर मौत हुई है तो मांझा बेचने और उड़ाने दोनों पर हत्या का केस दर्ज होना चाहिए | सरकार द्वारा कुछ लोगो को अगर ऐसी सजा दी जायेगी , तो लोग सचेत होकर इस धारदार धागे को टाटा और बाय - बाय कहने से चुकेंगे नहीं | अन्यथा पैसा कमाने की होड़ में लगे लोग दूसरे की जान की परवाह किये बिना इस ब्यवसाय को जारी रखेंगे और खरीदने वाले खरीदते रहेंगे और यूँ हीं सड़को पर कटता रहेगा गला और जमीन लहूलुहान होती रहेगी |
बिटिया
तो असमय हीं तड़पती हुई चली गई |अगर इंसानियत बाकी है तो उड़ाने और बेचने
वाले इस को यह सोंचकर त्याग करे कि -काश ! नेहा अंजना की जगह इनकी बेटी खड़ी
होती | नेहा अंजना को भारतवर्ष की तरफ से श्रधांजलि ...... ( न्यूज़ / फीचर
:- रुपेश आदित्य , एम० नूपुर की कलम से )
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