लाभ पंचमी / ज्ञान पंचमी / सौभाग्य पंचमी मनाने से पूरी होती है मनोकामना | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Nov 18, 2023
लाभ पंचमी कार्तिक माह के शुक्लपक्ष की पंचमी रौशनी का त्यौहार दीपावली के अंतिम दिन मनाया जाता है जो प्रथम अराध्य देव गजानंद गणपति बप्पा के आह्वान का दिन है | वैसे दीपावली त्यौहार का आरम्भ तो धनतेरस के दिन से हीं हो जाता है परन्तु इसका समापन पंचमी उत्सव के बाद होता है |
पंचमी को "लाभ पंचमी , ज्ञान पंचमी , सौभाग्य पंचमी" के नाम से संबोधित करते हैं | 2023 में पंचमी तिथि 17 नवम्बर की सुबह 11 बजकर 3 मिनट से आरम्भ होकर 18 नवम्बर की सुबह 9 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी |
गुजरात राज्य में पंचमी उत्सव की महत्ता बहुत ज्यादा है और यह बड़े हीं धूमधाम से मनाया जाता है | घर हो , दफ्तर हो या फिर व्यापार का स्थल सभी जगह साफ़ - सफाई करके वातावरण को सुंगधित बनाया जाता है | नए कार्य करनेवाले लोग पंचमी को अपना प्रतिष्ठान खोलना पसंद करते हैं | मान्यता है कि यह तिथि सुख - शान्ति और समृद्धि व प्रगति प्रदान करता है |
इस वर्ष लाभ पंचमी 18 नवम्बर शनिवार को है | नए खाताबही का उद्घाटन इस दिन करना शुभ होता है क्यूंकि पंचमी हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण दिन माना गया है | इस दिन शिव परिवार और माता लक्ष्मी की पूजा आराधना करने से समस्त विघ्न का नाश होता है | जिनलोगो ने किसी कारणवश दीपावली के दिन माँ लक्ष्मी की पूजा नहीं कर पाए हो तो वो माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस मौके को हाथ से नहीं जाने दे , आज के दिन माँ लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है |
वैसे तो नववर्ष का आरम्भ हमारे भारत में अलग अलग मान्यता के अनुसार मनाया जाता है | जैसे कि 1 जनवरी को सभी लोग नए वर्ष का उत्सव मनाते हैं तो महाराष्ट्र में गुडीपरवा के दिन , इसाई धर्म 25 दिसम्बर , कहीं 14 जनवरी , हिन्दू धर्म वाले होलिका दहन के बाद वहीं गुजरात में दीपावली के अगले दिन नववर्ष का आरम्भ होता है |
सालोंभर के कार्य की थकावट से कोसो दूर आज के दिन उत्सव मनाने के दौर में स्वयं में एक नया जोश / उमंग भरकर जिंदगी में उल्लास को लाते है| आज विद्यार्जन का कार्य भी प्रारंभ होता है | नए बहीखाते में शुभ - लाभ का निशान बनाते है तो कुछ लोग स्वास्तिक का चिन्ह भी बनाते है |
जैनधर्म में इस दिन बुद्धिज्ञान के लिए ज्ञानवर्धक पुस्तकों की पूजा की जाती है |
मंदिर में विशेष रूप से पूजा अर्चना करने का महत्व है | माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश से सुख समृद्धि हेतु कामना का दिन है | आज देवी देवताओं की मनमोहक झांकी सजाई जाती है | अधिकांशतः जगह पर तो श्रद्धालुगण यह दृश्य देखने के लिए घंटो प्रतीक्षा करते है और रात को भजनसंध्या के आयोजन में आनंदित होते हैं |
आज के दिन अपनो से मिलन का शुभ दिन माना गया है | गुजराती लोग आज के दिन को फायदे के पंचमी से भी संबोधित करते है |
बहुत कम जगह देखने को मिलेगा - माँ शारदा , लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर एक साथ , इसलिए कि दीपावली में लोग माँ लक्ष्मी की पूजा भगवान गणेश के संग करते हैं या फिर कहीं कहीं तो सिर्फ माता लक्ष्मी की हीं पूजा होती है | ऐसे में पंचमी तिथि को माँ शारदा की भी पूजा की जाती है |
खैर ............ कोई भी उत्सव या तिथि हो , भारत में मान्यता के अनुसार लोग देखा देखी हीं सही अनुकरण कर हर पर्व मनाते व मुंह मीठा करते है इसलिए भारतवर्ष को उत्सव / त्यौहार और पर्व का देश कहा गया है | ऐसा कोई माह नहीं जब हिन्दू धर्म में लोगो के अन्दर उत्सव की तैयारी न हो , लोग अपने अन्दर आस्था और विश्वास लेकर चलते है और त्यौहार मनाते हैं |
गर लाभ पाना हो तो श्रद्धा के साथ पंचमी के दिन अपनी जिंदगी में प्रकाश लाने हेतु माता व ईश्वर की आराधना कीजिये | विद्या , धन और बुद्धि का जहाँ आना होगा , शांति वहीं पहुंचेगी |
इसी विश्वास के साथ हम अगले फेज में आपको भगवान विष्णु की पूजा का एक दौर जो हर माह में दो बार मनाया जाता है और भगवान विष्णु काफी प्रसन्न होते है , इस व्रत का नाम है एकादशी | हमारे सनातन धर्म में व्रत और उपवास का महत्वपूर्ण स्थान माना गया है और यह हमारे हिन्दू परंपरा में शामिल है | माह के प्रत्येक एकादशी का एक विशेष नाम है जिसे हम अगले फेज में दर्ज करेंगे | ........... ( अध्यातम फीचर :- रुपेश आदित्या , एम० नूपुर की कलम से )
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