वर्तमान विधायक व पूर्व मंत्री मेवालाल चौधरी का कोरोना से निधन | IGIMS की लापरवाही से गई जान
- by Admin (News)
- Apr 23, 2021
कोरोना की महामारी व तांडव को हल्के में ना लें , संयम बरते , कहाँ किस हाल में कोरोना विचर रहा है कुंभकर्ण की तरह अपना विकराल रूप लेकर यह किसी को खबर नहीं | अदृश्य बना कोरोना इंसान के साथ - साथ घर पहुँच जाता है और एक के बाद एक को लीलता चला जाता है | जैसे की पुणे के एयरफोर्स सुपरिटेंडेंट के परिवार की हालत बनी वैसे हीं कितनो के हालात बनते जा रहें है |
कोरोना नहीं जानता की आप कितना धनवान है या कितना शक्तिमान | उसके तो डंक मारने के रूप हीं निराले है , जिसमे हर चेहरा काला है |
बीते सोमवार को बिहार के एक पूर्व मंत्री का कोरोना संक्रमण से मौत हो गई | हम जनता दल यूनाईटेड (JDU) के विधायक मेवालाल चौधरी की बात कर रहें है | बीते सोमवार को पटना के पास पारस अस्पताल में उनका निधन हो गया | सूचना के आधार पर मेवालाल के निजी सचिव सुभम सिंह ने बिहार के स्वास्थ्य व्यस्था की लापरवाही का पोल खोलकर सामने रख दिया |
उन्होंने क्लेश भरी स्थिति को तंज कसते हुए व्यक्त किया और कहा :- मुख्यमंत्री बिहार नितीश कुमार , विधायक जी की मृत्यु को व्यक्तिगत क्षति बताते है | लेकिन मुंगेर से पटना के बीच जान हथेली में लेकर मेवालाल ने क्या कुछ नहीं झेला है | सताधारी सिर्फ नाम रहने से क्या ? उन्हें भी आम आदमी की तरह दर - दर भटकना पड़ा है | उन्हें अस्पताल में सही तरीके से जगह मिल जाता और समय पर इलाज होता तो आज वे जीवित होते |
विधायक जी को कुछ समय पहले से बुखार था | शक के आधार पर उन्होंने मुंगेर में ही आर० टी० पी० सी०आर० टेस्ट कराया और जाँच रिपोर्ट की प्रतीक्षा 3 दिन करते रहे , परन्तु रिपोर्ट नहीं प्राप्त हुआ | 15 अप्रैल को जब स्थिति और ज्यादा बिगड़ी तब उन्होंने फिर आर० टी० पी० सी०आर० रिपोर्ट की मांग की | लेकिन ! फिर भी जाँच रिपोर्ट नहीं मिला | बहुत जूझने के बाद तब जाकर उन्हें 16 अप्रैल को रिपोर्ट प्राप्त हुआ |
मेवालाल के साँस की गति में कठिनाई होने के कारण 15 अप्रैल को ऑक्सीजन सपोर्ट पर उन्हें रखा गया और पटना लेकर आ गए | तमाम रास्ता उन्हें खांसी होता रहा | लोगों ने उन्हें अदरख चबाने को दिया | रात्रि के 12:30 बजे उन्हें पटना के सरकारी आवास पर ऑक्सीजन सपोर्ट पर हीं रखा गया |
अगली सुबह उन्हें पटना के इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) ने रैपिड एंटीजन टेस्ट निगेटिव आने पर भर्ती करने से इंकार कर दिया | मेवालाला ने अपनी बार - बार खांसी आने की बात कही और साँस की गति के विषय में अपनी स्थिति जाहिर किया और आर० टी० पी० सी०आर० टेस्ट करने का आग्रह किया | लेकिन डॉक्टर ने कहा कि इसका रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन लग जाएगा और आपका रिपोर्ट पोजेटिव आने से पहले वो हॉस्पिटल में भर्ती नहीं कर सकते |
हर प्रयास विफल हुआ , इसके बाद भी पूर्व मंत्री स्वयं को अक्षम मानकर अपने सभी श्रोतों से मदद मांगी , लेकिन IGIMS में बेड नहीं मिल सका | इसके बाद पटना के पारस अस्पताल ने भी बेड के अभाव में भर्ती करने से इंकार किया | बावजूद जिलाधिकारी चंद्रशेखर का इसमें हस्तक्षेप पर ,फोन दबाव बनाने के बाद पारस अस्पताल ने बेड दिया |
वहां डॉक्टरों ने मिस्टर चौधरी के सीने की सिटी स्कैन करायी तो ! गंभीर कोरोना संक्रमण पाया गया | ICU में बेड उपलब्ध नहीं होने से उन्हें इमरजेंसी वार्ड में रखा गया जहाँ ऑक्सीजन सपोर्ट व सेलाइन की व्यवस्था थी | 18 अप्रैल को डॉक्टर ने उनके फेफड़े का ठीक से काम नहीं करने की बात कही और कहा - इन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना होगा | मिस्टर चौधरी 18 अप्रैल की रात , वेंटिलेटर पर गए और ....
19 की सुबह 4 : 30 बजे उनकी मौत की सूचना अस्पताल वालों ने दी , वे इस दुनियां को अलविदा कह चूके थे |
ये था वर्तमान विधायक महोदय की कोरोना काल के दौरान संक्रमण ग्रसित होने पर यात्रा वृतांत | लेकिन ! आखिरी दास्ताँ बहुत पीड़ा दायक था | सफल हो जाते तो पुरानी तकलीफ याद नहीं आती | परन्तु उनके मरने से गुजरा हुआ वक्त याद आ गया , सदैव याद रहेगा |
सुभम सिंह ने सवाल किया है कि :- जब एक सताधारी दल के बड़े विधायक के साथ अस्पतालों में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई तो ! आम आदमी की स्थिति व हाल को महसूस किया जा सकता है |
मेवालाल चौधरी ने जिंदगी से हाथ तो धो लिया , शरीर से प्राण पखेरू उड़ गए , पंछी आजाद हुआ | लेकिन ! सवाल यह भी है कि , किसकी - किसकी जिंदगी कितने दिन की है इस पृथ्वी पर ? तो फिर ! क्यूँ नहीं ईमानदारी पूर्वक हर व्यक्ति अपनी कुर्सी की मर्यादा को कायम रखने का प्रयास करते हैं |
अब ! अपने हीं हाथ बचानी होगी अपनी जिंदगी | उपरोक्त विधायक जी की हालत देखकर और मर्म को समझकर ऐसा लगता है कि , धरती के भगवान "डॉक्टर" एवं चिकित्सा व्यस्थापक को इस कलयुग में क्या नाम दिया जाये ? हर संभव जिंदगी को सुरक्षित रखने का प्रयास करें , जिंदगी न मिलेगी दूबारा | "जिंदगी बचाव अभियान" ..... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )

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