कोरोना से मृत व्यक्ति को एम्बुलेंस सेवा वाले मनमानी रुपये नहीं ले सकते , लुधियाना प्रशासन ने लगाईं लगाम
- by Admin (News)
- Apr 30, 2021
चिकित्सा व्यवस्था से लेकर शमशान तक के कार्यकर्तागण , सब के सब हो रहे मालामाल , दवा कंपनी भी कर रही कमाल | सिर्फ आम आदमी है कंगाल | जन के बाद धन भी गंवाना पड़ रहा है | ये बिजनेस मैन एम्बुलेंस वाले शव को छोड़ भी देते हैं , उन्हें क्या पड़ी है , पैसा दो तो पहुँचायेंगे अन्यथा तुम्हारा प्रॉब्लम तुम समझो |
ये वक्त है भईया कोरोना का , लूट सको तो लूट लो , सबसे बड़ा रुपईया है |
एक बेचारे के पास पैसा कम था | एम्बुलेंस वाले ने 5000 माँगा तो मृत मरीज के परिजन , रात में ठेले पर शव को लेकर निकल पड़े |
आदमी को चाहिए कि वक्त से डर कर रहे , क्या पता किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज |
लुधियाना के RTA संदीप सिंह गढ़ा और ACP ट्राफिक गुरुदेव सिंह के साथ बैठक में हिस्सा लेते , एम्बुलेंस ऑपरेटर्स के बीच फिक्स हुआ एम्बुलेंस का रेट | चूकि कोरोना महामारी के मरीजों को लाने ले जाने में पैसा की मनमानी को देखते हुए इनपर पाबंदी लगाया गया है और प्रशासन ने लगाम कसते हुए नया फरमान जारी किया |
इस आदेश में अब 25 किलोमीटर तक की सफ़र तय करने के लिए - 2500 रुपये मरीज परिजन को देने होंगे और वेंटिलेटर सुविधा वाले एम्बुलेंस वैन को 25 किलोमीटर तक 5000 रुपये का किराया निर्धारित किया गया है |
बीते सोमवार को जब शमशान से ऑटो रिक्शा और साइकिल रिक्शा पर शवों को आते - जाते देखा गया | तो ! मिला मृत के परिजनों को एवं एम्बुलेंस संचालकों को लुधियाना प्रशासन का साथ | कोरोना मृतक को शमशान पहुँचने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिली तो ऑटो रिक्शा व ठेला वाले एवं अन्य सवारी भी कम पैसे में अपना बिजनेस शुरू कर दिया | कैसे भी हो , पैसे तो आ हीं रहे थे और इन सब का भी रोजी - रोजगार चल रहा था |जब एम्बुलेंस वाले मृत शरीर पहुंचा सकते है तो ठेला और ऑटो वाले क्यूँ नहीं ? यह देख एम्बुलेंस वाले की भी हालत खस्ती हुई |
अब ऑटो में कोरोना शव को देखकर हड़कम्प मच गया | बीते मंगलवार को RTA संदीप सिंह गढ़ा और ACP ट्रैफिक गुरुदेव सिंह ने एम्बुलेंस ऑपरेटरों की बैठक कर इस नतीजे पर पहुँचने के लिए उन्हें किलोमीटर सहित राशि का मापदंड तय किया | अब एम्बुलेंस ओपरेटर ज्यादा किराया वसूलेंगे तो उनपर करवाई की जायेगी |
अब 25 किलोमीटर पर 2500 और 5000 रुपया का किराया तय , साथ हीं 25 किलोमीटर से एम्बुलेंस आगे बढ़ा तो 12 रुपये प्रति किलोमीटर अतिरिक्त एवं वेंटिलेटर सुविधा वाली एम्बुलेंस में 25 रुपये प्रति किलोमीटर अतिरिक्त राशि देने होंगे |
दम भरते मरीज के मरने के बाद परिजन का हाल तो बेहाल हो जाता है | ऐसे में 5000 रुपये एम्बुलेंस को देने के लिए क्या सभी के पास उपलब्ध होगा ? दूसरी बात की उनके मरीज मर जाते हैं तो क्या वो 2500 दे पाएंगे ? अगर ! ऐसा होता तो लोग ठेले पर शव को क्यूँ ले जाते | इससे अच्छा होता की जिन लोगों का कोरोना के दौरान मृत्यु हुई है उन्हें सरकार के द्वारा निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाती | थोड़ा तो राहत मिलता परिजनों को | ..... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )
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