ओवर टेक के चक्कर में दुल्हे की गई जान , 24 घंटे की भीतर ज्योति का सुहाग उजड़ गया
- by Admin (News)
- May 01, 2021
आए दिन दुनियां में बहुत से हादसे होते होते रहते हैं | जिसे भूल पाना बड़ा हीं मुश्किल होता है , वहां , जहाँ अपने लोग खड़े हो |
अभी कोरोना महामारी का दूसरा विकराल रूप देश के इर्द - गिर्द घूम रहा है और लोग निहत्थे बने बैठे हैं | अपने हाथ में कुछ नहीं , जिससे हालात व माहौल को बदला जा सके | कोरोना से इंसान की मृत्यु होती है तो लोग अपनों की मृत्यु के मर्म को भुलाने की कोशिश करते हैं |
मगर ! वहीं यह देखा जाए की शादी के बाद सोलह श्रृंगार से सजी दुल्हन , इंतजार में बैठी अपने पिया के घर पहली बार कदम रखने के लिए आतुर हो और कोई हादसा हो जाए जिससे उस हादसे में सुहागन का अचानक मांग उजड़ जाए , तो वहां का आलम क्या होगा ? सिर्फ अनुभव किया जा सकता है | ऐसी दुल्हन को न हम सुहागन बोल सकते है और न हीं अविवाहित |
बीच भंवर में फंसी भिंड शहर की एक बेटी जिसका नाम ज्योति है , 24 घंटे के भीतर हीं विधवा हो गई | ईश्वर ऐसा दुःख किसी को न दें | इससे बेहतर है आजीवन कुंवारे रह जाना , खैर ....
मध्यप्रदेश के भिंड शहर में सोनू बाल्मीकि की किन्नौठा गाँव में बारात लेकर पहुंचते है | रात को पुरी रित - रिवाज से सोनू व ज्योति की विवाह कि रश्मे पुरी होती है | सुबह बेटी ज्योति की विदाई में सारे लोग लग जाते हैं | उधर दूल्हा सोनू अपने भाई के साथ कार सजाने के लिए निकल पड़ता है | दुल्हे की कार तेज गति से अटेर - पोरसा हाईवे पर पहुँचने के बाद तेज गति की कार को ओवर टेक करने की चक्कर में पास हीं बिजली के खम्भे से जा टकराती है | हादसे के बाद चीख - पुकार मचती है | एक्सीडेंट इतना भयानक की गाड़ी दो टुकड़ों में बंट जाता है और सोनू की उसी जगह मौत हो जाती है | बाकी लोग गंभीर रूप से घायल है |
दामाद सोनू की मृत्यु की खबर जैसे हीं लड़की वालो को सुनाई पड़ती है तो उनके पैरो तले जमीन फिसल जाता है | वहीं ज्योति जैसे हीं अपने सुहाग की खबर उजड़ते हुए सुनती है तो लगातार बेहोशी का आलम घर के लोगों की धड़कनें तेज करता है और ज्योति को बार - बार होश में लाने का प्रयास किया जाता है |
पड़ोसी व समाज यहीं दोहरा रहे है की विधाता की आखिर ऐसा क्या मंजूर था ! मांग भरने के 24 घंटे के बाद हीं विधवा हो गई | दुल्हे के परिजनों का भी रो - रो कर बुरा हाल है |
दूल्हा बना सोनू भिंड शहर से बाल्मीकि किन्नौठा गाँव में बारात लेकर पहुंचा था | अब लड़की की डोली की जगह दामाद के शव को कन्धा देना पड़ा | लड़की ससुराल पहुंचती और वहां का चमकता - दमकता खुशियों से भरा माहौल प्रीति भोजन के लिए सजता और लोग कई पकवान खाकर , वर - वधु को आशीर्वाद देकर घर लौटते | उसकी जगह अब समाज वाले उस लड़के को मंजिल तक पहुँचाने के लिए अपने कांपते हुए कदम बढ़ायेंगे |
इससे तो अच्छा होता की विवाह हीं न होता | कम से कम लोग गुलशन को उजड़ते और तेज़ाब से सराबोर तड़पते हुए तो न देखते , दुल्हन की जिंदगी व बेटे वालों के घर के हालात को |
ज्योति की एक दुनियां तो उजड़ गई | अब पता नहीं हालात किस करवट रुख बदलता है , कि फिर वो अपना दूसरा जहान बसा पाएगी या तमाम उम्र अपनी पति की यादों में गुजार देगी | फिलहाल कहना मुश्किल है |
सही या गलत लेकिन तेजी से ओवर टेक करने का नतीजा सामने दिखाई पड़ता है और यह बहुत गलत है | देर से हीं सही अपनी मंजिल सुखद और खुशियों से भरा होना चाहिए | न की दूसरे को हराने के दौड़ में अपनी गाड़ी को फ़ास्ट चलाते हुए अपनी जिंदगी को त्रस्त कर देना , इसमें कोई बुद्धिमानी नहीं नजर आता |
ऐसे में सोनू की जान चली गई लेकिन ! दो परिवार की जिंदगी इस क्लेश को क्या कभी भुला पायेगा | ड्राईवर की एक छोटी सी भूल ने दो परिवारों के खुशियों से भरा गुलशन को पल में जला दिया | ..... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )

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