इंदौर में जिलाधिकारी के व्यवहार से परेशान होकर महिला CMHO पूर्णिमा गड़रिया ने दिया इस्तीफा |
- by Admin (News)
- May 12, 2021
कोरोना का बढ़ता तांडव और इंसानी सोंच , गतिविधि और उड़ान को न जाने किसकी नजर लग गई , कि आये दिन कुछ न कुछ गड़बड़ियाँ पैदा हो जा रही है | इंसान जानकार भूल करता नहीं मगर उनसे भूल हो जाती है | अभी का माहौल हीं कुछ इस तरह का है की राहत की दो बूंद भी कहीं नशीब नहीं ! एक अपना दुःख और वहीं देश के दुखों को देखकर लोग बेचैन है | तो यहीं पर कदमों का लड़खड़ाना विवाद पैदा करत है |
ऐसे में इंदौर जिले की बात करे तो इंदौर CMHO ने दुखो होकर अपना इस्तीफा भेज दिया है | अब यह इस्तीफे वाली बात चारो तरफ हड़कंप मचा दिया है और लोग कारण ढूंढने लग गए | अभी कोरोना काल में लोगों की सर्विस छूट रही , तो लोग बेचैन है और सर्विस को त्याग देना अपने आप में एक बड़ी सजा है |
सूचना के आधार पर - कांग्रेस के विधायक संजय शुक्ला , CMHO को मनाने उनके दफ्तर पहुंचे | क्यूंकि संजय शुक्ला ने सोशल मीडिया पर जारी किया गया जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर पूर्णिमा गड़रिया का इस्तीफा देखा था , जो गाडरिया ने स्वयं पोस्ट किया था | डॉक्टर पूर्णिमा ने इस इस्तीफे में किसी अन्य बातो का जिक्र नहीं किया था | लेकिन कहते है न , बहुतों के पास अर्जुन वाली आँखे होती है , जो शब्दों से बहुत कुछ जवाब निकाल लेता है | डॉक्टर पूर्णिमा ने मीडिया को बताया और वहां के जिलाधिकारी मनीष सिंह पर सीधा आरोप लगाया कि - मै लागातार उनके बदतमीजी का शिकार हो रही हूँ और इसी कारण से शासकीय सेवा से त्याग - पत्र देने पर मजबूर होना पड़ा |
उन्होंने आगे कहा कि - पिछले कुछ दिनों से लगातार देख रही हूँ , वे मुझसे लगातार बदतमीजी से बात कर रहे हैं और वे अपनी हर नाकामी को मेरे सर पर फोड़ते है और स्वस्थय विभाग के अफसरों को निकम्मा कहते है और साथ हीं कहते है की नौकरी छोड़ दो नहीं तो सस्पेंड कर दूंगा | अब डॉक्टर पूर्णिमा गड़रिया जी के संवाद का ऑडियो भी तैयार हुआ जहाँ आज उनकी भाषा - शैली , उनके इस्तीफे का कारण बयाँ करता है | खैर दोनों अपने क्षेत्र के पारंगत है और देश झुककर चलता है अपनों के बीच युद्ध से नहीं | ऐसे में देश के हर विभाग के लोग , उतना हीं महत्वपूर्ण है जितना की जिलाधिकारी महोदय की कुर्सी |
मगर ! अब तो बात ,नाक से ऊपर , सर तक पहुँच चूका है और आने वाले कल में पता चलेगा की आखिरकार डॉक्टर पूर्णिमा अपने कार्य पर वापस लौटती है या बातों को दूर तलक ले जाती है |
कभी - कभी बातों को एक याद बनाकर स्वयं में संशोधन करने की कोशिश इंसान को एक - दूसरे के करीब लाता है | ऐसे में झुकाने से बेहतर भी कभी - कभी झुकना सेहत , माहौल और देश पर अच्छा प्रभाव छोड़ता है | चूकि कहा गया है कि , जिस पेड़ में आम लगते है , वह डाल स्वतः झुक जाता है | जिस पेड़ में आम नहीं वह क्यूँ झुकेगा ? समझदारों के लिए इतनी बात हीं काफी है | ........ ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )

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