DAP खाद के दाम बढ़ाए जाने पर , किसानों को बेहाल देख , कोटा के मनोज दुबे का छलका दर्द |
- by Admin (News)
- May 24, 2021
"अखिल भारतीय बेरोजगार मजदूर किसान संघर्ष समिति" कोटा के राष्ट्रीय अध्यक्ष "मनोज दुबे" का दर्द किसानों के लिए छलक गया | जब खाद के दाम में अचानक 700 रूपया का उछाल देखा |
उन्होंने DAP खाद के दाम में बदलाव को लेकर कड़ी निंदा की है | DAP खाद की कीमत 1200 रुपये थी , इसमें इजाफा किया और बढ़ाकर 1900 कर दिया गया | अचानक खाद के बोरी पर 700 रुपये का बढ़ जाना , किसानों का कमर तोड़ देने के बराबर है | वह भी इस कोरोनाकाल और लॉकडाउन जैसे नाजुक परिस्थिति में |
केंद्र सरकार और खाद उत्पादक सहकारी समिति इफ्को (IFFCO) द्वारा किसानों पर , ये कैसा शिकंजा कसा गया कि वे बेहाल हुए | किसानों को बेहाल कर देने की साजिश , भारत के लोग कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे |
अध्यक्ष मनोज दुबे ने कहा कि - हम किसान को बेकल / बेहाल होते हुए नहीं देख सकते | मोदी सरकार लगातार किसानों की आय दोगूनी करने का जूमला देती आ रही है | क्या DAP के दामों में भारी बढ़ोतरी करके , ऐसे हीं किसानों की आय दुगूनी करेगी ? या किसानों को बर्बाद करके रख देगी !
मनोज दुबे ने स्पष्ट कहा कि - किसान जमीन के भगवान होते हैं , उनके कलपते हुए दिल और आँखों से आंसू की धाराओं को , हम बहते नहीं देख सकते | इसलिए केंद्र सरकार बढ़ाई गई राशि को वापस ले , नहीं तो किसानों पर लगातार हो रहे जुर्म / नाइंसाफी , एक आन्दोलन का रूप लेगी |
मनोज दुबे का किसानों के प्रति ऐसी सोंच / नजरिया / संवेदना और उनके लिए सरकार से लड़ लेने तक की प्रवृति आने वाली पीढ़ी के लिए एक इन्द्रधनुषी सुमार्ग का सन्देश है |
भारत की संवेदना , सीधा किसान की भावना से जुड़ा है | इसलिए देश में पहली प्राथमिकता किसान को मिलनी चाहिए , जो धुप और वर्षा की प्रवाह किये वगैर अन्न उगाते हैं | तब ! जाकर तपते हुए पेट को राहत मिलाती है | इनके जितना मेहनतकश तो कोई नहीं होता | खाद पर दाम बढ़ना , ऐसा पहली बार नहीं हुआ है और न हीं आखिरी है | जब मजदूर / किसानों के मसीहा बने लोग आन्दोलन पर उतर जाते है और सोशल मीडिया पर बवाल मचाता है , तब जाकर IFFCO को सफाई देनी पड़ती है |
अब IFFCO ने अपने बचाव में सफाई दी है कि - वह पुराने रेट पर हीं खाद बेचेंगे और बढ़े रेट सिर्फ बोरियों पर प्रिंट करने के लिए थे | साथ हीं कहा है कि - सोशल मीडिया पर जो रेट वायरल हो रहे हैं , वे किसानों के लिए लागु नहीं है |
अब ! सवाल है कि जब रेट बढ़ा हीं नहीं , तो फिर ! उसे छापा हीं क्यूँ गया ? खैर ...... |
यह देखकर , मनोज दुबे का गुस्सा और भी ज्यादा गर्म हुआ | जहाँ DAP उर्वरक के 50 किलो की बोरी में 40 किलो खाद भरकर बेचा गया | उन्होंने कहा ऐसी कालाबाजारी ! हम किसानों को कालाबाजारी का शिकार कदापि नहीं होने देंगे | इंतजार करने के बाद जब शासकीय सोसाइटी से उर्वरक दिया जा रहा है तो भी किसानों की जेब काटी जा रही है , ये सभी बातें , उनके प्रति नाइंसाफी जैसा पुख्ता सबूत है और इसके बाद का अंजाम कि किसानों के आत्महत्या करने जैसी बातें सामने आती है |
किसान जब भी फसल डालने के लिए खेत तैयार करते है , उनके फसल के समय खाद के दाम बढ़ा दिए जाते है , जिससे किसान चिंतित रहते हैं | मनोज दुबे के अनुसार इस बार भी अचानक 700 रुपये जैसी बेतहाशा वृद्धि किसानों के कमर को तोड़ने जैसा है | अपनी नाराजगी जताते हुए दुखी हुए और कहा - हम किसानों के दिल को रेगिस्तान नहीं बनने देंगे |
सहनशक्ति से भरपूर , किसानों की , ख़ामोशी पर मत जाइए , दुनियां को जीत लेने की ताकत , इनमे मौजूद है | ........ ( न्यूज़ / फीचर :- रुपेश दुबे )

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