दरभंगा के जिलाधिकारी की मदद से , अजीत सिंह ने कोरोना से मृत अपने बेटे का शव प्राप्त किया |
- by Admin (News)
- Jun 04, 2021
बिहार के दरभंगा जिले के रजवाड़ा गाँव के रहने वाले अजीत सिंह , जिनके 32 वर्षीय बेटे दिलीप सिंह को 5 मई को कोरोना हुआ | कोरोना रिपोर्ट आने के बाद इन्हें दरभंगा के किसी अस्पताल में जगह नहीं मिली तो उन्हें पटना के निजी युनिवर्सल अस्पताल में ले गए |
अजीत सिंह , बेटे को बचाने में लगभग 9 लाख रुपये खर्च कर दिए | इतने रुपये उनके पास नहीं थे , तो उन्होंने कर्ज लिया और बेटे की जान बचाने की खातिर अपनी जमीन तक बेच दी | अजीत सिंह ने JNU के वरिष्ठ नेता मंत्री महेश्वर हजारी से भी पैरबी लगवाई |
बेटे की तबियत जब ठीक नहीं हुई तो 21 मई को बेटे को दरभंगा के पास पारस अस्पताल में भर्ती करवाया | अस्पताल ने कोरोना टेस्ट करवाए बिना हीं दिलीप सिंह को भर्ती किया | उपचार आरम्भ हुआ , परन्तु 29 मई की रात उनकी मृत्यु हो गई | 2 बजे उन्होंने अपने बेटे का शव माँगा , तो अस्पताल प्रशासन ने अजीत सिंह को बेटे की शव लेने से पहले सारा बकाया चुकाने को कहा | अजीत सिंह ने अपनी मज़बूरी व्यक्त किया तो , उन्हें धमकाया गया | अजीत सिंह बस इतना चाहते थे की किसी तरह अपने बेटे के लाश को लेकर उसकी दाह - संस्कार की प्रक्रिया को पूरी कर दी जाए | परन्तु अस्पताल वाले पुलिस बुलाने की धमकी देने लगे , तो अजीत सिंह भय से बाहर आ गए |
बाहर निकलने पर उन्हें कबीर सेवा संस्थान के संयोजक नविन सिन्हा ने मदद की और दरभंगा के जिलाधिकारी डॉक्टर त्यागराजन की मदद व हस्तक्षेप से बेटे का शव मिल गया | फिर दरभंगा जिलाधिकारी ने जाँच बिठाई , तो पता चला कि दरभंगा के पारस अस्पताल वालों ने बेटे के मरने के बाद का भी दवा देने का बिल बना दिया है | मरीज दिलीप सिंह 3 दिन हीं वेंटीलेटर पर थे | जबकि अस्पताल वालों ने 9 दिन वेंटिलेटर पर रखने का बिल बनाया | यह बात उजागर होकर सामने आया , साथ हीं मरीज को अनावश्यक और अत्यधिक दवा भी दी गई जिसकी जरुरत हीं नहीं थी |
आज ऐसे डॉक्टर , जिन्होंने शर्मनाक हरकत की और वो अस्पताल जिन्होंने जिंदगी से खेला , इन्हें देश के तरफ से क्या सजा मिलनी चाहिए ?
सूचना के आधार पर दरभंगा जिलाधिकारी ने मीडिया को कैमरे पर कुछ भी कहने से रोक लिया | परन्तु उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर अनुशासनिक व क़ानूनी कारवाई करने की बात कहते हुए सख्त आदेश दिए है | साथ हीं अस्पताल द्वारा तय रकम से ज्यादा पैसो में से 1 लाख 12 हजार रुपये अस्पताल से वसूल कर पीड़ित को वापस दिलवाने का आदेश भी दिया है |
यह पहला मामला नहीं है और न आखिरी है , जब लाश देने के वक्त मरीज से अस्पताल वाले मुंह मांगी रकम वसूलते है | अपने परिवार के सदस्य के मृत शरीर को कोई यूँ हीं तो नहीं छोड़ देता | ऐसे हीं अगर दरभंगा के जिलाधिकारी महोदय ने अगर अजीत सिंह को सहायता नहीं करते तो पीड़ित का क्या होता !
ऐसे अस्पताल वाले और स्वास्थ्यकर्मियों के विरोध में हीं तो योग गुरु बाबा रामदेव कदम बढ़ा रहे है और यहीं बात उनके दिल को छलनी करता है | जब इनकी लापरवाही से लोगों की मृत्यु होती चली जाती है | ......... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )

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