पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में मुहर्रम के जुलुस के दौरान बम विस्फोट , 3 की मौत 50 से ज्यादा घायल | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Aug 19, 2021
पाकिस्तान में हर जगह मुहर्रम का जुलुस निकाला गया , परन्तु पंजाब राज्य के बहावलनगर में बम विस्फोट से 3 लोगों की मृत्यु हो गई |
आज के दिन हर साल की तरह इस साल भी धार्मिक जुलुस निकाला गया , जिसे शिया मुसलमान समुदाय के लोग निकालते हैं | क्यूंकि इस दिन शिया समुदाय के लोग मातम मनाते है |
यह घटना अभी सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है , जिसमे लोग देख सकते है कि - किस तरह वहां बम धमाको ने इस धार्मिक शांतिपूर्ण जुलुस के बीच क्रांति ला दिया | सड़क किनारे बैठे कई घायल अपनी मदद के लिए इंतज़ार कर रहे हैं | विडियो में पुलिस और एम्बुलेंस घटना स्थल पर जाते भी दिखाई पड़ रहे है | पंजाब राज्य का यह बहुत हीं शर्मनाक घटना कहा जा सकता है | जिन्होंने शिया समुदाय की वेदना को नहीं समझते हुए इस घटना को अंजाम दिया |
शिया समुदाय के लोग हर साल हजरत इमाम हुसैन की मौत का शोक मनाते है | 7 वीं शताब्दी में पगैम्बर मोहम्मद के पोते हजरत इमाम हुसैन को शहीद कर दिया गया था | शिया समुदाय इसी मौत की यादें हर वर्ष उनकी पूण्यतिथि के मौके पर भावपूर्ण श्रधांजलि देते हुए उन्हें याद करने के साथ हीं मातम भी मनाते है | मातम ऐसा की वह स्वयं को अपने हीं हाथ यातनाएं देकर , इस दिन को एक अलग रूप और हुसैन की जुदाई को अपने व्याकुलता / दर्द / क्लेश / पीड़ा और उनके प्रति अपनी फुरकत के मर्म को चाहत के रूप में दर्शाते हैं |
आज भी उनके समुदाय के लोगों ने जुलुस निकाली और कई जगहों पर जुलुस निकाली गई होगी | मगर सूचना के आधार पर - बहावलनगर में जुलुस के बीच सड़क किनारे बम ब्लास्ट हुआ , जिसमे 3 लोगों की मृत्यु के साथ 50 लोग से ज्यादा घायल हो गए | शहर के पुलिस अधिकारी मोहम्मद असद और शिया के नेता खावर शफाकत ने बम धमाके की पुष्टि की है | गवाहों द्वारा आँखों देखा हाल के मुताबिक शहर में तनाव काफी बढ़ गया है | अब बदला लेने की बात भी चल रही है |
शिया के नेता ने इस घटना की निंदा करते हुए बताया कि - जुलुस जब भीड़ वाले इलाके मुजाहिर कॉलोनी से निकल रहा था तो हमला किया गया | शिया नेता ने सरकार से ऐसे अन्य जगहों पर निकाले गए जुलुस में सुरक्षा बढ़ाने की मांग करते हुए आग्रह किया है | इस उत्सव का नाम है अशुरा उत्सव | यह उत्सव उन शहीदों की याद में मनाया जाता है , जिसमे ताजिए बनाये व सजाये जाते है और इसी ताजिए का जुलुस निकाला जाता है | यह ताजिए उन शहीदों के प्रतिक होते हैं | इन्हें लेकर घुमा जाता है और मातम मानाने के बाद उन ताजिए को कर्बला में दफनाया जाता है |
ईराक में आज भी इमाम हुसैन का मकबरा है | शिया समुदाय के लोग कहते है कि - "या हुसैन , हम न हुए" | इसका एक विशेष महत्व है , मातम, मानाने वाले लोग यह कहते है कि - हजरत इमाम हुसैन हम बहुत दुखी है , क्यूंकि आपके साथ कर्बला के जंग में नहीं थे | हम भी इस्लाम की रक्षा के लिए आपके साथ सहादत देते |
अधिकारीयों ने आशुरा ( 10 मुहर्रम ) से एक दिन पूर्व सम्पूर्ण देश में मोबाइल फोन सेवा निलंबित कर दी | 10 मुहर्रम को कर्बला में मोहमम्द इमाम हुसैन को शहीद कर दिया गया था | नए साल की 10 तारीख को नवासा - ए - रसूल इमाम हुसैन अपने 72 साथियों और परिवार के साथ मजहब - ए - इस्लाम को बचाने और हक़ को जीवित रखने के लिए शहीद हो गए |
मुस्लिम शासक यजीद के सैनिकों ने ईराक के कर्बला में घेर कर इन्हें शहीद कर दिया था | यह बहुत हीं दर्दनाक दृश्य रहा होगा | इसलिए शिया परिवार हर साल इस दर्द को ताजा करते हैं और दुःख जाहिर करते हुए मातम मनाते है |
जबकि आज मुहर्रम का चाँद भी दिखा | इस्लामिक कलेंडर के अनुसार आज नया साल है , परन्तु इस दिन ख़ुशी नहीं मनाई जाती |
पाकिस्तान का यह शर्मनाक घटना , जहाँ धार्मिक जुलुस में बम विस्फोट किया गया और 3 लोगों की मृत्यु , 50 से ज्यादा लोगों के घायल होने की सूचना है , यह बहुत हीं निंदनीय और दर्दनाक है | कभी मंदिर , कभी मस्जिद , कभी गुरुद्वारा , कभी चर्च और आज जुलुस में बम विस्फोट किया गया | विस्फोट करने वाले को जरा भी खौंफ नहीं अल्लाह से / खुदा से / ईश्वर से या फिर उस पॉवर से जहाँ से उन्हें हवा , पानी , खानपान और रहने का ठिकाना मिल गया | जिस धरती पर ये रह रहे हैं , इन्हें शर्म आनी चाहिए ऐसी घटिया हड़कत करते हुए | चाहे वह किसी देश के हो , किसी मजहब के हो , सवाल यह नहीं है | सवाल यह है कि - जिस धरती पर ये रहते हैं , उसी धरती पर विस्फोट क्यूँ करते हैं ? इस सवाल का जवाब अभी तक समझ से पड़े है | ..... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )

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