सांप को राखी बांधने से पहले हीं जीवन का अंत , सिवान का भयावह दृश्य | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Aug 28, 2021
अपनी सोंच को उजागर करने के लिए सबसे पहले परिस्थिति को देखना निहायत जरुरी है | भावना में इंसान को इतना भी नहीं बह जाना चाहिए कि वे स्वयं हीं अपनी तबाही का मिशाल बन जाए | क्यूंकि समय कब करवट बदलता है , यह सोंच से भी परे है , जहाँ इंसान की पहुँच नहीं | यह माना जा सकता है कि - जैसे सूर्य की गति कुछ देर के लिए हीं सही , परन्तु यह सच है कि वह बादलो से ढक जाता है |
हम बात कर रहे है राखी के उत्सव पर दुनियां को छोड़कर चले जाने वाले मनमोहन सिंह की ऐसी हीं सोंच पर , जिसे कोई भी सुनकर आश्चर्य में पड़ जाएगा कि आखिरकार उन्होंने ऐसा क्यूँ किया ? लेकिन जिंदगी जब मौत बन जाती है , तो वह कोई न कोई कारण छोड़ जाती है | समय कभी भी अपने ऊपर दोष नहीं लेता और ढक देता है चक्रव्यूह में फंसाकर दोष को |
बिहार के सिवान जिले के मांझी प्रखंड के सितलपुर निवासी 25 वर्षीय मनमोहन सिंह ने रक्षा बंधन के दिन अपने पालतू सांप को रक्षा सूत्र बांधने का आदेश अपनी बहन को दे दिया | बहन ने अपनी भाई की बात मानकर इस बात को स्वीकार करते हुए कदम बढ़ाई |
रक्षासूत्र बांधने की जब बारी आई तो अपनी कलाई बढ़ाने से पहले मनमोहन सिंह ने कहा - पहले इन दो साँपों को राखी बांधो और उन्होंने दो विषैले पालतू सांप की पूंछ पकड़कर राखी बंधवाने की कोशिश की | मनमोहन को जिले भर में सांपो का सच्चा मित्र भी कहा जाता है | सांप के जोड़े को उनकी बहन रक्षा सूत्र बांधने के लिए आगे बढ़ती कि इससे पहले हीं सांप ने मनमोहन के पाँव को डंस लिया |
मनमोहन बीते 10 वर्षों से इसका मंत्र जानते थे | इसलिए इनके कटाने से वो लोगों को उपचार कर देने का दावा भी करते थे | दसक से अधिक अनुभव होने के बाद भी ये स्वयं को बचा न सके | सांप काटने के बाद उनका परिजन झार - फूंक कर उनका इलाज करने लगे | इस बात की भनक जैसे हीं गाँव में लगा ,लोग अपने - अपने तरीके से झार - फूंक करने लगे | वहां सैकड़ो की भीड़ इकट्ठी होती देख सांपो के झारने वाले भी वहां पहुँच गए |
मनमोहन की हालत पल - पल बिगड़ती चली गई , तब जाकर उन्हें पास के अस्पताल में ले जाया गया | उस अस्पताल में एंटिक विनर इंजेक्शन नहीं रहने के कारण उन्हें छपरा सदर अस्पताल ले जाने की सलाह चिकित्सको ने दी | गौर करने की बात है कि इस अस्पताल तक मनमोहन खुद अपनी बाइक चलाकर आये थे | अस्पताल से एम्बुलेंस की सहायता से उन्हें छपरा ले जाया गया , मगर बहुत देर हो चुकी थी | चिकित्सको ने उन्हें मृत घोषित कर दिया |
एक महत्वपूर्ण जिंदगी जो कल तक दूसरो को सांप के काटने पर जीवन दान देता रहा , उन्हें हीं अपना जीवन नहीं मिल पाया | अपनी भावनाओं में बहकर उन्होंने आग की दरिया में छलांग लगाया था | उन्होंने जरा भी नहीं सोंचा कि वे सांप के पूंछ को पकड़ रखा है और सांप बेजुबान होते है | हो सकता है सांप के पूंछ को पकड़ने पर सांप को कहीं न कहीं दर्द उठा हो और दर्द से तड़पकर उन्होंने मनमोहन को डंस लिया | रक्षा सूत्र , ईश्वर या ऐसे जगहों पर चढ़ाने के लिए होता है जो सिर्फ अपनी भावनाओं को प्रगट करे और सिर्फ इंसान के कलाई पर हीं इसे बाँधा जाता है |
भावनाओं की समुन्द्र में इस कदर भी बहना उचित नहीं , जिसमे अपने हीं पाँव धरती को छोड़ देने पर मजबूर हो जाए |
आज इनके परिजन अपनी चीखे किसे सुनाये !
आपको बता दे - जिस सांप ने उन्हें डंसा था , वह 70 साल पुराना गेहूअन सांप था और दूसरा सांप विषधर फुह्कार मार रहा था और दोनों हीं पिंजरे में सुस्त पड़े थे |
बहन जब मनमोहन को राखी बांधने के लिए आई , तो न जाने उन्हें क्या सुझा ? कि उन्होंने सांप को राखी बंधवाने की बात कह दी और पिटारे से सांप को निकालकर खुली जगह पर उनका पूंछ पकड़कर खेलने लग गए | पिटारे में बंद साँपों का बेचैन मन , अपनी स्वतंत्रता का राहत तो ढूंढेंगा | बंद रहना किसे पसंद , जो जंगल में राज करता हो | पालतू होने के बावजूद सांप ने उन्हें डंसा , यह एक सबक और सीख है सबके लिए | वे अपनी भावनाओं को मजाक न बनने दे | बेजुबान भाषा को समझने की कोशिश करे , तभी जिंदगी बचाई जा सकती है | अन्यथा मनमोहन जी की भावनाओं की तरह जीवन का अंत सुनिश्चित है |
बहुत दुःख की बात है कि , आज एक ऐसे जीवन का अंत हो गया , जिसकी मेहनत से घर के चूल्हे जलते थे | मनमोहन एक बिजली मिस्त्री थे और ये तीन भाई थे | अब घर की स्थिति कौन संभालेगा ?
दूसरी बात कि वे सांप के काटने का मंत्र जानते थे , जिससे बहुतो को फायदा मिला | अगर मनमोहन सांप काटे गए व्यक्ति तक नहीं भी पहुँच पाते , तो वे अपने मोबाइल द्वारा हीं मंत्रो के जरिये भी विष उतार दिया करते थे और इसके बदले में उन्होंने कभी किसी से पैसा नहीं लिया | लेकिन राखी के इस पावन त्यौहार का दिन उनके लिए दुर्भाग्य में बदल गया और परिवार के लिए काला दिवस साबित हुआ | इस खतरे को जानबूझकर आमंत्रित किया गया | ऐसा कहा जा सकता है कि - "आ बैल मुझे मार" |
संभले और बेजुबानो से इस तरह की उम्मीद न करे , जिस तरह हम इंसान से रूबरू होकर उन्हें अपनी बातों से समझा देते है , या फिर उनके वार करने पर उनकी कलाई को हम पकड़ सकते है , बेजुबानों के साथ ऐसा कदापि नहीं है |
चलते - चलते हम आपको आँखों देखा एक कहानी बता दे - यह भी बिहार का हीं है - एक व्यक्ति सांप को इतना चुम्बन लिया की उसके जीवन का अंत वहीं पर हो गया | वक्त ने डॉक्टर बुलाने तक का समय नहीं दिया | ....... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )

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