स्वामी विवेकान्द से जुड़ी प्रासंगिक बातें | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Oct 10, 2021
उठो जागो और तब तक रुको नहीं जबतक मंजिल प्राप्त न हो जाए , यह कथन स्वामी विवेकान्द जी का है | उनकी निःस्वार्थ लगाव , प्रेम हर किसी को अपनी जिंदगी में उतारने / ग्रहण करने लायक है |
प्रसंगवश एक बातें याद आती है - एक बार किसी शिष्य ने गुरुदेव की सेवा से घृणा और निष्क्रियता दिखाते हुए नाक ,भौंह सिकोड़ी | यह देख विवेकानंद जी को क्रोध आ गया |
वे अपने उस गुरुभाई को सेवा का पाठ पढ़ाते और गुरुदेव के प्रत्येक वस्तु के प्रति प्रेम दर्शाते हुए उनके विस्तर के पास रक्त , कफ आदि से भरी थूकदानी उठाकर फेंकते व साफ करते थे |गुरु के प्रति अनन्य भक्ति और लगन के प्रताप से हीं वे अपने गुरु के शरीर और उनके दिवयतम आदर्शों की उत्तम सेवा कर सके , गुरुदेव को समझ सके और स्वयं के अस्तित्व को गुरुदेव के स्वरुप में विलीन कर सके एवं आगे चलकर समग्र विश्व में भारत के अमूल्य अध्यात्मिक भण्डार का महक फैला सके | ऐसी थी उनके महान व्यक्तित्व के नींव में गुरुभक्त , गुरुसेवा , गुरुप्रेम और गुरु के प्रति अत्यधिक लगन , जिसका परिणाम सारे संसार में चर्चित है |
स्वामी विवेकानंद अपना सम्पूर्ण जीवन गुरुदेव रामकृष्ण परमहंस को समर्पित कर चुके थे | उनके गुरुदेव का शरीर अत्यंत रुग्न हो गया था | गुरुदेव के शरीर त्याग के दिनों में अपने घर और कुटुंब की नाजुक हालत व स्वयं के भोजन की चिंता किये बिना गुरु के जर्जर शरीर की तरफ प्रेम त्याग का सागर बहाए बेहद टूटने के कगार पर थे | खेवइया के बिना नइया पर सवार होने जैसी हालत में अपना सुध खो चुके थे और गुरु की इस सेवाकृपा ने उन्हें विश्वस्तरीय उंचाई की बुलंदी पर पहुंचाकर इतिहास गढ़ गया | ....... ( भव्याश्री डेस्क )

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