35 साल बाद जन्म ली बेटी तो दादा हेलिकॉप्टर से पोती को घर लाये , खर्च किये 7 लाख रुपये
- by Admin (News)
- Apr 24, 2021
35 साल बाद घर में बेटी पैदा हुई तो दादा ने अपनी पोती को हेलिकॉप्टर से सैर कराते हुए घर लाया |
अब ! सैर कहाँ से कहाँ तक हुई , पहले हम ये बता दें - तो 40 किलोमीटर की दूरी हेलिकॉप्टर ने मात्र 10 मिनट में तय की | इसे देख चारो तरफ बधाई हो बधाई का ताँता व शोरगुल होता चला गया |
ऐसा नजारा फिल्मों में तो जरुर देखा जाता है , जैसे फिल्म "दिल है की मानता नहीं" में पूजा भट्ट से शादी करने के लिए उनके होने वाले विलेन पति ने अपनी बारात हेलिकॉप्टर से हीं उतारी थी और लोग सर उठाकर आसमान में देख रहे थे दुल्हे को और दुल्हे के उतरने का नजारा | तो ये तो फिल्म थी लेकिन हकीकत की बात की जाए तो एक सामान्य परिवार में इस तरह का शौक पालना वह भी इस कोरोना काल के दौरान जिसमे इंसान एक - एक रुपये के लिए मोहताज हो , बहुत बड़ी बात है |
20 / 25 वर्ष पहले मदनलाल प्रजापत ने सोंचा था की हमें पोती हो जाए तो उसे हम लाड - प्यार से हेलिकॉप्टर में लायेंगे | अब इतने वर्षों के बाद आई है पोती , तो ! हमारे देश को भी तो पता चले "बेटी पढ़ाओ , बेटी बचाओ" कार्यक्रम का उद्देश्य |
यह सुखद स्थिति व मन को सुकून देने वाली खबर राजस्थान के नागौर के एक किसान परिवार की है | जहाँ 35 साल बाद एक बेटी के जन्म लेने पर खुशियों के अनमोल खजाना लुटाने के साथ हीं इस परिवार ने अपनी आर्थिक स्थिति सदृढ़ न होते हुए भी , प्यारी लाडो को लाने में खर्च किये लाखों रुपये | हम इसका आंकड़ा भी आपको दे देते है |
हेलिकॉप्टर के पीच बनवाने व पुलिस और दमकल में लगाये गए - डेढ़ लाख रुपये और साढ़े पांच लाख रुपये हेलिकॉप्टर व आयोजन समारोह , प्रीतिभोज आदि में खर्च किये गए | तो कुल मिलाकर एक नन्ही कलि को उसके ननिहाल से दादा के घर मात्र 40 किलोमीटर आने में लगाये गए 7 लाख रुपये | अब सवाल ये है की इतना रुपये आये कहाँ से ? जबकि पहले हीं हम बता चुके है की ये परिवार बहुत हीं सामान्य है |
दादा मदनलाल प्रजापत के पास पूर्व फसल की 4 लाख रुपये जमा थी | उनके लड़के हनुमान राम प्रजापत की पत्नी चुका देवी ने 3 मार्च 2021 को अपने मायका नागौर जिले के हीं गाँव हरसोलव में एक बेटी को जन्म दिया था | खबर मिलते हीं दादा - दादी ख़ुशी से उछल गए , 35 साल बाद उनकी मनोकामना पुरी हुई थी | उन्होंने अपने पोती का यादगार वेलकम करने का मन बनाया और पोती का नाम रखा रिया |
अब बात थी की हेलिकॉप्टर उतरेगा कहाँ ? तो ! उन्होंने नागौर जिला के कलेक्टर जितेन्द्र कुमार सोनी से हेलिकॉप्टर उतरने की अनुमति लेने की जैसे हीं आवेदन डाला , यह खबर चारों तरफ वसंती पवन के झोखें बनकर खुशबु लुटानी शुरू कर दी | कलेक्टर साहब ने स्वीकृति देते हुए खेतो में अस्थाई हेलीपैड का निर्माण करवाया | पुलिस व दमकल की व्यवस्था हुई , इस पीच पर डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए | अब हेलीपैड से लेकर घर तक पुरा रास्ता फूलों से सजाया गया व बैंड बाजे का भी इस्तेमाल पुख्ता रखा गया |
अब डेढ़ लाख रुपये पीच में खर्च हो चुके थे , पुरे खर्च में राशि आनी थी 7 लाख | अब दादा - दादी जरा भी विचलित नहीं होते हुए तुरंत अपनी सरसों , मेथी व जीरा का फसल बेच डाला , जिससे उन्होंने 4 लाख रुपये इकठ्ठा कियें और तब अपनी पोती को अपनी बहु - बेटों के साथ बहुत हीं धीमी व सुरक्षित गति से हेलिकॉप्टर से पाने गाँव ले आया और जैसे हीं हेलिकॉप्टर पीच पर उतरा की वहीं बैंड - बाजों की शोर , उल्लास भरा गीत बजने की आवाज दूर - दूर तक फैलती चली गई और सारे गाँव को पकवान खिलाये गए |
स्वागत में गाँव की गलियों में पहले से हीं फूल हीं फूल बिछा दिए गए थे | वह दृश्य गाँव का शायद पहला हीं दृश्य है जब एक पोती के लिए दादा ने 7 लाख रुपये खर्च किये | इस कदर के स्वागत को शायद हम आठवां अजूबा नाम दे सकते हैं |
रिया जब बड़ी होगी तो उसके दिल में अपने दादा के प्रति कितना प्यार उमड़ आएगा | वो सोंचने पर मजबूर होगी की हमारे स्वागत के लिए दादा ने अपनी एक साल की फसल बेच दी थी और 7 लाख रुपये लूटा दिए मात्र 40 किलोमीटर के लिए | ..... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )

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