मोदी सरकार की 7 वर्ष के कार्यकाल पर कोटा के मनोज दुबे की तीखी प्रतिक्रिया |
- by Admin (News)
- May 31, 2021
"अखिल भारतीय बेरोजगार मजदूर किसान संघर्ष समिति" कोटा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने मोदी सरकार के 7 वर्षों के कार्यकाल पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए , गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि - आखिर कब तक मजदूर , किसान , बेरोजगार भाई - बहन , सुख के दिन आने का इंतज़ार करते रहेंगे |
मनोज दुबे ने गहराई से सोचते हुए नम आँखों से कहा - 2014 से सुख का इंतज़ार करते - करते लोगों की आँखें पथरा गई और हम 2021 में प्रवेश कर चुके है | अब और कितना देश इंतज़ार करेगा ? जब सुख की रोटी सेकी जायेगी ! यहाँ तो सिर्फ उद्योगपतियों के विकास की आंधियां चलती हुई दिखाई पड़ रही है और दूसरी तरफ किसान काँटों के सैया पर , अपने सपनों को जख्मी होते देख रहे हैं |
ये वही शक्तिमान किसान है , जो पुरे देश के लोगों का पेट अपनी मेहनत से भरते है और इसके एवज में केंद्र सरकार किसान विरोधी बिल लाकर उनके सामने परोस रही है , जो किसान को पसंद नहीं और जब पसंद न हो तो उसे कोई कैसे ग्रहण करे | कुछ रुकते हुए दुबे ने आगे कहा - किसान के सब्र का बाँध टूटता जा रहा है | किसान बिल के कारण कई किसान ख़ुदकुशी कर बैठे हैं | जिद्द पर अड़ी मोदी सरकार को लोगों ने क्या यहीं दिन देखने के लिए मुखिया पद पर विराजमान किया था ! डर लगता है , कहीं किसान के आँखों की आंसू रेगिस्तान न बन जाए | अभी तो लोग कोरोना से ग्रस्त है , अगर किसानों ने हड़ताल बोल दिया तो लोग भूख से तड़प - तड़प कर .... इतना बोलते हुए मनोज दुबे ने अपने शब्दों को रोकते हुए आगे कहा - किसान पिछले 6 माह से आन्दोलन पर है | इनकी आमदनी दोगुनी होनी तो दूर की बात , इन्हें फसल का उचित दाम तक मेयसर नहीं और खाद की बात करे तो कभी आर कभी पार वाली बात है |
अपने भारत में बेरोजगारों की संख्या में हर दिन इजाफा हो रहा है | नाम बड़े व दर्शन छोटे वाली मिशाल से आखिर भारत कैसे चलेगा ? युवाओं की पनपती सोंच बेरोजगारी में दबकर विलुप्त हो रही है |
मोदी सरकार ने कहा था - सबका साथ , सबका विकास , परन्तु यहाँ भी धोखा | साथ तो सबने दिया परन्तु विकास का दीपक सिर्फ उधोगपतियों के घर को रौशन कर रहा है | 2014 से 2021 की तुलना करे तो पायेंगे की कुछ उद्योगपति की स्थिति जमीं से आसमान की ऊँची उड़ान पर सैर कर रही है | सरकार ने नवरत्न कंपनियों को बेचने का काम किया , जिससे रोजगार के अवसर समाप्त हो गए | न काला धन लौटा और ना हीं नोटबंदी से देश का कुछ भला हुआ |
उधोगपतियों को छोड़कर बाकी के लिए समुन्द्र की रेत पर अपने सपनों का महल बना रही है सरकार , जिसका कोई अस्तित्व नहीं और आजाद भारत के इसी देश में तपती रेत पर आज किसान , मजदूर , बेरोजगार भाई - बहन मजबूर , बेवस व लाचार दिख रहे है | इनके व्याकुल आंसुओं का जुर्माना कौन भरेगा ?
7 वर्ष विफलता में गई , चाहे कोरोना काल में , बेरोजगारों , मजदूरों , किसानों व आमजन को नकद देने की बात हो या प्रति वर्ष 2 करोड़ बेरोजगारों को रोजगार देने की बात हो | पेट्रोल , डीजल , गैस के दामों में बेतहासा वृद्धि को कम करने की बात रही हो , वहां भी सभी को निराशा हाथ लगी | ढेरों सवालों और जवाब की कड़ी में आखिरी शब्द मनोज दुबे ने पिरोया कि - झूठ के जुमलो और खोखली वादों की बुनियाद पर टिका मोदी सरकार का इमारत आखिर कब तक खड़ा रह पायेगा !
प्रधानमंत्री मोदी के लिए मनोज दुबे का शिकायत भरा पिटारा जिसमे उन्होंने किसानों , बेरोजगारों और मजदूरों का साक्ष्य , सबूत पेश करते हुए प्रश्नचिन्ह लगाया है ? आने वाले 2024 के चुनाव से पहले क्या सबकुछ पहले जैसा हो पायेगा ! मोदी सरकार अपनी लोकप्रियता बरकरार रख पाएगी या फिर लोकप्रियता में बढ़ोतरी होगा या फिर कम हो जाएगा , ये तो आने वाला कल हीं बताएगा | ....... ( न्यूज़ / फीचर :- रुपेश दुबे )

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