Kash ! Thahar Jate Poem | Hindi Poem Kash ! Thahar Jate | काश ठहर जाते कविता एम० नूपुर | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Aug 02, 2021
काश ! ठहर जाते
शून्य पड़ गए हम समेटते - समेटते
फिर भी ! तुम पूरे न हुए
निकल गए दूर कितने , खुशियों की तलाश में
जिंदगी अभी बाकी है , समेट लायेंगे दुनियां तुम्हारे लिए
चाहत मुड़कर देखा नहीं , सूर्य अस्त को है
जब बेचैन होती है नजर , तलाश सुबह की
मिलता नहीं तो , पागल हो जाता है मन
डूब जाती है नजरें , खो जाता है चैन
ये कैसा सितम ? वक्त के हाथ लूट गए
हम पढ़ सके , न तुम कुछ कहे
खो गए अनमोल वो पल , सांसे कम पड़ गई
बीनकर कहाँ से लाये हमारे लिए
पल - पल रीत गया , सावन बीत गया
पतझड़ में कैसी बरसात ?
खुशियाँ तुम्हारी मै थी , एहसास हुआ जब
जिंदगी शाम हो गई
कविता : आदित्या , एम0 नूपुर की कलम से
संबंधित पोस्ट
हमें फॉलो करें
सब्सक्राइब करें न्यूज़लेटर
SUBSCRIBE US TO GET NEWS IN MAILBOX
लाइव क्रिकेट स्कोर
शेअर मार्केट
Ticker Tape by TradingView
Stock Market by TradingView

रिपोर्टर
Admin (News)