सर्वे के दौरान पाया गया - जहाँ गौशाला वहां कोरोना संक्रमण की पहुँच नहीं | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Aug 06, 2021
दक्ष प्रजापति 18,575 साल से पूर्व पैदा हुए थे | धार्मिक मान्यताओं के अनुसार , संसार में प्राचीनतम पुस्तक ऋग्वेद है | आयुर्वेद में बताया गया है कि - स्वयं ब्रह्मा जी ने दक्ष को आयुर्वेद का ज्ञान दिया था | पहले केवल तीन हीं वेद थे - रूद्र वेद , यजुर्वेद और ऋग्वेद | अर्थववेद बाद में लिखा गया है |
आयुर्वेद ग्रंथों के परम्परा में ब्रह्मा आयुर्वेद का प्रथम उपदेष्टा है | वेदों में अश्विनों और रूद्र देवता के अतिरिक्त अग्नि , वरुण और इंद्र अभिनिहित किया गया है | वेद , आयुर्वेद शास्त्र के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक एवं स्त्रोत है |
औषधियों का विस्तृत विवरण अर्थववेद में हीं पाया जाता है | अर्थववेद में 289 औषधियों का उल्लेख किया गया है | इन चार वेदों में आयुर्वेद से सम्बंधित सैकड़ों मंत्रो का वर्णन है , साथ हीं विभिन्न रोगों की चिकित्सा का उल्लेख है | इन चारो वेदों में अर्थववेद को हीं आयुर्वेद का आत्मा माना गया है | संसार में ऐसी कोई भी बीमारी उत्पन्न नहीं , जिसका उपचार आयुर्वेद में संभव नहीं |
मथुरा वृन्दावन की 33 गौशालाओं में सर्वे किया गया | इन 33 गौशालाओं स्थल पर कोई भी व्यक्ति कोरोना से संक्रमित नहीं हुआ है | यहाँ के सभी लोग सुरक्षित है , यहाँ कोरोना का नामोनिशान तक नहीं पाया गया | इसी तरह के बातें ब्रजक्षेत्र और उत्तरप्रदेश के गौशालाओं से आयी है | अब तो मथुरा के अधिकारीयों का भी कहना है कि - कोरोना से लड़ने के लिए यह बहुत हीं आवश्यक है , कि इस दिशा में वैज्ञानिक स्तर पर व्यापक सर्वे और शोध कराई जाए और यह एक ऐसा उपचार दिखाई पड़ रहा है , जिससे की इस कोरोना महामारी से लड़ने के लिए एक नई राह व दिशा मिलेगी |
90 वर्षीय अधिवक्ता लाल बहादुर सिंह जो एक सामाजिक कार्यकर्त्ता भी हैं , ये आजमगढ़ के रहने वाले है | जब कोरोना का प्रकोप फैला तो , इनके इलाके में सिर्फ इन्हीं का घर इस प्रकोप से बचा रह गया | फिर इन्होने अपने स्तर से आजमगढ़ में गौशालाओं के सर्वे कराने शुरू कर दिए , तो वहां भी कोरोना का प्रकोप नहीं पाया गया | इस बात से आचम्भित हो अधिवक्ता महोदय ने इसे गाय माता की सेवा का प्रताप माना | उन्होंने मीडिया को बताया कि - वे पिछले महीने मथुरा गए थे | वहां उनकी कुछ संतो और सरकारी अधिकारीयों के साथ इस बिंदु पर चर्चा हुई | चर्चा में ब्रिज विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष व पूर्व IPS एस० के० मिश्र , CDO नितिन गौर आदि जन वहां मौजूद थे | इन अफसरों की पहल से यहाँ सर्वे कराया गया और नतीजा बिल्कुल 90 वर्षीय अधिवक्ता लाल बहादुर सिंह की सोंच पर खड़ी उतरी |
आखिरकार धीरे - धीरे कोरोना उन्मूलन के प्रति लोगों का नजरियाँ बदलता हुआ जान पड़ रहा है और आयुर्वेद की तरफ लोग दस्तक देना आरम्भ कर चुके हैं | कहा गया है - गौ मूत्र , गाय का गोबर , दुग्ध उत्पादन आदि अमृत सामान है | गाय की गोबर को अधिकांशतः शुभ कार्यों के इस्तेमाल में लाया जाता है | वहीं कई रोगों का जड़ से खात्मा गौ मूत्र से किया जा चूका है और दुग्ध को अमृत माना गया है , जिससे बच्चें पोषित होते है |
इतना तक कि , हिन्दू पूजन में सब देवों के देव महादेव की जीवनसंगनी माता गौरी और पुत्र गणेश की पूजन में , इन्हीं गाय के गोबर से उनकी प्रतिमा भी बनाई जाती है | अध्यात्मिक नजरियें व आयुर्वेद की दृष्टि से गौशाला के हर एक बिंदु पर गौर करते हुए , यहाँ के दिनचर्या को जीवन संजीवनी का नाम दिया जा सकता है |
आखिरकार धीरे - धीरे योग गुरु बाबा रामदेव और आयुर्वेद के सहारे हीं कोरोना को घुटना टेकने पर मजबूर किया जा सकता है | आयुर्वेद वैज्ञानिकों का दावा है कि - पंचगव्य , एंटी बायोटिक्स , एंटी फंगल एजेंट और कैंसर विरोधी दवाओं को भी अधिक प्रभावी बना सकता है | आरंभिक दौर से हीं हमारा भारत आयुर्वेद पर निर्भर है |
सत्यतता की बात की जाए तो - श्री हनुमान ने संजीवनी बूटी लाकर श्री लक्ष्मण के प्राण बचाए थे | इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता और मानना पड़ेगा कि - प्रकृति के एक - एक पत्तों में अथाह गुण छुपा है | वैसे हीं गौशाला में अथाह गुण छुपा है | उदाहरण इस बात से लगाया जा सकता है कि - हालिया में किये गए सर्वे से मथुरा उत्तरप्रदेश का एक ऐसा अकेला जिला है , जहाँ 93 हजार गौवंशीय पशु है | आरंभिक दौर और दूसरी लहर , दोनों में हीं इसका प्रकोप नहीं देखा गया है |
सूचना के आधार पर बीते दिनों मथुरा के CDO नितिन गौर ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी से मार्च 2020 से अबतक जिले में 33 पंजीकृत गौ आश्रम स्थलों में कार्यरत गाय सेवक जन की रिपोर्ट मांगी गई थी | यहाँ इस गौशाला में कार्यरत करीब 218 सेवकों में से कोई भी व्यक्ति Covid-19 से संक्रमित नहीं हुआ और न हीं उन्हें किसी तरह की शिकायत से जूझना पड़ा | यहाँ की सबसे बड़ी "उधर गौशाला" में 3 हजार के करीबन गाय है , जिसकी देखभाल के लिए 40 सेवकों का सहयोग लिया जाता है | मथुरा में 2500 गाय है और 70 सेवकगण | अब इस बात से सोंचा जा सकता है कि - इस गौशाला में करीबन 11 हजार से भी ज्यादा गौवंशीय है |
सर्वे के दौरान , एक बड़े गौशाला के संचालक राधाकांत शास्त्री ने कहा है कि - हमें हैरत है कि कोरोना के दौरान गौशाला में किसी को भी मामूली बुखार या खांसी तक भी नहीं हुआ है |
वहीं बरसाना की बात करे तो - संत रमेश बाबा की "माताजी गौशाला" देश का सबसे बड़ा गौशाला में से एक कहा जा सकता है | इस गौशाला में 55 हजार के करीब गाय है , इस गौशाला में गौ सेवकों की संख्या लगभग 300 है | ये सभी गुरुकुल और आश्रम में हीं रहते हैं | इन सबके पास कोरोना फटका तक नहीं | संत रमेश बाबा को गौ सेवा के लिए 2019 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा जा चूका है |
Covid -19 वैज्ञानिकों के लिए , जो पीछले कई महिना से इस निदान को ढूंढने में लगे है , आज भी सफलता नहीं मिली , यह शोध का विषय है | इस बातों पे 90 वर्षीय अधिवक्ता लाल बहादुर सिंह की पैनीदृष्टि रंग लाई | अब सरकार को इस बात को मानते हुए - अपने भारत को कोरोना से बचाव के लिए , इसी पद्धति को अपनाना सफलता की ऊंचाई मानी जा सकती है | गाय की हर सांसों में औषधीय गुण का खान है , यह 100% सत्य है |
योग गुरु बाबा रामदेव ने इस बात की चर्चा की थी कि - आयुर्वेद में हर वो बीमारी का ईलाज संभव है | उन्होंने हमेशा कोरोना महामारी के दौरान आयुर्वेद पर जोड़ डाला था , परन्तु उनकी वाणी , विवादों में उलझ कर रह गई और लाखों लोगों ने अपनी जान गँवा दी | आज फिर सर्वे के आधार पर एक आयुर्वेद औषधि की चर्चा लाल बहादुर सिंह ने CDO नितिन गौर और पूर्व IPS अधिकारी और ब्रज विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे एस० के० मिश्र ने ऐसा अनुभव किया है , तो इस पर कदम बढ़ाना चाहिए | यह पूर्णरूप से सत्य है कि - किसी भी रोग का इलाज आयुर्वेद में संभव है , तो इसे नाकारिए नहीं |
आरंभिक दौर से गाय हमारी माता है , हम पढ़ते आ रहे हैं | तो अब ये भी पढ़ना जरुरी है कि - गाय हमारी माता है और हमारी माता को , हमारी रक्षा करने आता है | ......( न्यूज़ / फीचर :- आदित्या , एम० नूपुर की कलम से )

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